सिद्ध भूमि न्यूज़ नेटवर्क: मैं पूछती हूँ, एक सवाल क्यूँ बनती हूँ हर बार मैं ही शिकार ? ये है , एक बेटी की पुकार कोई तो सुन लो मेरी गुहार । क्या रात , क्या दिन , क्या छोटी , क्या बड़ी हर उम्र में , उन दरिंदो ने बनाया शिकार । आखिर कब तक चलेगा ये रिवाज मैं पूछती हूँ ये सवाल। एक चलती सी साँस को रोक दिया , हे भगवान ! एक नन्ही सी जान को नोच दिया , आखिर तूने , उसे कैसे बक्श दिया । वो रोई होगी , चिल्लाई भी होगी क्या उन हैवानो को दया नही आई होगी । पहले निर्भया , तो अब मनीषा बन गई शिकार किसे पता , कितने बेटियों को देना है बलिदान हे राष्ट्र के रक्षक ! तोड़ दो इस कड़ी को , वरना एक भी बेटी नही बचेगी , अगले घड़ी को मैं पूछती हूँ , ये सवाल आखिर कब तक , दरिंदे देंगे इसे अंजाम।। निधि मणि त्रिपाठी इलाहाबाद विश्वविद्यालय