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मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लंदन की पहचान:बिग बेन क्लॉक टॉवर

वंशिका सक्सेना :     वर्ष 1859 में आज ही के दिन लंदन की पहचान कहे जाने वाले बिग बेन क्लॉक टावर ने काम करना शुरू किया था| और माना जाता है कि बिग बेन को अपना नाम ब्रिटिश सिविल इंजीनियर सर बेंजामिन हॉल से मिला था| ब्रिटेन की संसद के पास मौजूद इस क्लॉक टावर में चार गाड़ियां लगी हैं और इसकी ऊंचाई 315 फीट है| खास बात यह है कि बिग बेन में लगी पहली बैल का वजन 16 टन था जिसे टावर तक एक घोड़ा गाड़ी के जरिए पहुंचाया गया था| यह टॉवर एक ब्रिटिश सांस्कृतिक आइकन है जिसे दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है| यह यूनाइटेड किंगडम और संसदीय लोकतंत्र के सबसे प्रमुख प्रतीकों में से एक है, इसका उपयोग अक्सर लंदन में स्थापित फिल्मों के स्थापित शॉट में किया जाता है| 21 अगस्त 2017 को, टॉवर पर नवीकरण कार्यों का चार साल का कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें एक लिफ्ट को शामिल करना है| घड़ी के डायल को फिर से चमकाने की योजना भी है|  घड़ी विशेष रूप से दृश्य मीडिया में यूनाइटेड किंगडम का एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गई है| जब एक टेलीविजन या फिल्म निर्माता देश में एक सामान्य स्थान को इंगित करना चाहता है, तो ऐसा करने का...

10-अंकीय मोबाइल फोन नंबर से लेकर 11 अंक: नई नंबरिंग प्रणाली का सुझाव दिया गया

सृष्टि, सीतामढ़ी (बिहार):   टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने फोन कनेक्शन बढ़ाने के लिए एक नई योजना जारी की है। नियामक प्राधिकरण का दावा है कि मोबाइल फोन और फिक्स्ड लाइन फोन दोनों के लिए नंबरिंग संसाधन समाप्त हो रहे हैं। ट्राई ने दावा किया कि भारत में लगभग 1.2 बिलियन टेलीफोन नंबर हैं, जिसका मतलब है कि इसका टेल-डेंसिटी 87.47 प्रतिशत है। कनेक्शन की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि ट्राई एक नई नंबरिंग योजना पर योजना बना रहा है। जब निष्पादित किया जाता है, तो यह नया नंबरिंग सिस्टम सभी मोबाइल फोन नंबर बदल देगा। नियामक ने कुछ सिफारिशें भी रखीं, जो एक ओपन हाउस चर्चा के दौरान हितधारकों से मिले इनपुट पर आधारित थीं, जो उन्होंने जनवरी महीने में आयोजित किए थे। सिफारिशों में सबसे बड़े बदलावों में से एक मौजूदा 10-अंकीय प्रणाली से 11- अंकीय प्रणाली में मोबाइल नंबरिंग योजना का स्थानांतरण था। ट्राई का दावा है कि यह कदम कुल 10 बिलियन की क्षमता प्रदान करेगा। मौजूदा मोबाइल नंबरों के लिए क्या बदलेगा? वर्तमान संख्या के साथ एक ...

पढ़िए क्या बात करते हैं दीपिका पादुकोण के घर वाले, इंस्टाग्राम पर शेयर किया व्हाट्सएप ग्रुप का स्क्रीनशॉट

विपिन, नई दिल्ली। बाॅलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण लाॅकडाउन का पूरा मजा उठा रही हैं। लाॅकडाउन में वह फैमिली संग जमकर मस्ती कर रही हैं। इस पूरे लॉकडाउन में दीपिका अपनी पर्सनल लाइफ खासकर फैमिली से जुड़ी कई बातें सोशल मीडिया पर शेयर कर रही हैं। हाल ही में दीपिका ने अब अपने फैमिली वॉट्सऐप ग्रुप चैट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। इससे खुलासा हुआ कि दीपिका ने रणवीर का नंबर किस नाम से सेव किया है। दीपिका ने अपने इंस्टाग्राम में फैमिली वॉट्सऐप ग्रुप की चैट शेयर की है। स्क्रीनशॉट के मुताबिक दीपिका पादुकोण ने पति रणवीर सिंह का नंबर हैंडसम नाम से अपने फोन में सेव किया है। वहीं दीपिका ने अपनी मम्मी उजाला पादुकोण का नाम अम्मा नाम से सेव किया है। पिता प्रकाश पादुकोण का नाम पापा से और अपने ससुरजी का नाम जगजीत सिंह भवनानी के नाम से शेयर किया है। दीपिका ने तस्वीर के साथ लिखा;इस तरह से हम बात करते हैं। हमारे परिवार में सभी का दिन बेहतरीन गुजरा। हर किसी ने मेरे पति के इंटरव्यू की तारीफ की जो उन्होंने दिया था। ये हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है दीपिका के फैमिली ग्रुप में एक इंटरव्यू पर बातचीत हो रही है। इसमें स...

सावधान! सिंथेटिक दूध का इस्तेमाल जोरों पर

 राधेश्याम शास्त्री (तहसील प्रभारी, तमकुहीराज, कुशीनगर,उ०प्र०):     सावधान! कहीं सेहत अच्छी बनाने के चक्कर में आप अपनी सेहत खराब‌ करने की तरफ तो नहीं बढ़ रहे हैं। जी! हां यह मामला जुड़ा है उस दूध से जिसे आदि युग से भरपूर ताकत हासिल करने का माध्यम मांना जाता रहा है। लेकिन वही दूध आज अवैध धनार्जन का जरिया बन कर लोगों को  तरह-तरह की बीमारियों से मुब्तिला कर रहा है। क्योंकि इसमें पानी के साथ-साथ सिंथेटिक का भी‌ जबरदस्त इस्तेमाल कर इसे बेचा जा रहा है। आपको बताते चलें कि यह गड़बड़ी  कुशीनगर जनपद के दुदही,सेवरही  व तमकुही राज विकास खंड क्षेत्र के बाजारों सहित जनपद के सम्पूर्ण विकास खंड क्षेत्र के बाजारों चाक -चौराहों में है  |  वर्तमान में जिले में अगर‌ किसी की चांदी है तो उन डाक्टरों की जिनके यहां ‌मरीजों की लम्बी कतारें किसी भी समय देखी जा सकती है। इन मरीजों में शामिल ‌लोगों को तकलीफें ऐसी‌ जिनके बारे में सोच कर दिमाग का दर्द शुरू हो जाता है। सूत्र‌ बताते हैं कि रोज  ज्यादातर दुधिया अपने-अपने घर में भोर पहर में दूध निकाल कर सीधा चल पड़ते ...

खुले‌‌ में हो रही मांस-मछली की बिक्री

 राधेश्याम शास्त्री (तहसील प्रभारी, तमकुहीराज, कुशीनगर,उ०प्र०):     इन दिनों कोरोना वायरस बीमारी प्रदेश में ही नहीं बल्कि पुरे  देश में अपना पांव पसार चुकी है।इससे बचाव के लिए प्रशासन ने बिना स्वास्थ्य परीक्षण कराये खुले में मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगा रखा है।लेकिन कुशीनगर जनपद के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के विकास खंड दुदही, थाना-विशुनपुरा क्षेत्र के कस्बा-दुदही बाजार,ठाढीभार, गुरवलिया,जंगल लालाछपरा के दुबौली बाजार, मठिया चौराहा,गोड़रिया बाजार चौराहा, जंगल नौगांवा, नरहवां बाजार, बैकुंठपुर कोठी, पुष्कर नगरदशहवां, माधोपुर गौरीश्रीराम बाजार,व तमकुही राज तहसील क्षेत्र के तमकुही रोड कस्बा, तमकुही राज,लतवाचटी,सलेमगढ़,तरयासुजान,भावनपुर,गौराहां,दोमाठ,घघवा जगदीश,दाहूगंज, पिपराघाट जीरो,बनरहां रेग्युलेटर,बभनौली सहित अन्य बाजारों में मांस-मछलियों‌ की‌ खुले में बिक्री की जा रही है।इनका स्वस्थ्य परीक्षण भी नहीं कराया जा रहा है। इनके अपशिष्ट पदार्थों को या तो खुले में छोड़ दिया जाता है अथवा नाले में डाल दिया जाता है। दुदही क्षेत्र‌ के सम्भ्रांत लोगों ने खुले में मांस-मछलियों...

किसानों का 'हल'- चौधरी चरण सिंह

ह्रितिक जोशी :    मौजूदा सदी वाले भारत में कोई असहाय ग़रीब व सरकारी योजनाओं से 'अछूत' किसानों का जुबानी ज़िक्र किए बिना नेता (तथाकथित लोगों का "लीडर") बना हैं क्या? उम्मीदों का ठीकरा तो तब फूटता हैं, जब किसानों का केवल ज़िक्र ही होता हैं। क्या करे? नाउम्मीदियों का दौर हैं, झेलना ही पड़ेगा। मगर एक ज़माना ऐसा भी था जब ऐसी  नाउम्मीदियाँ एक विचारधारा के चरणों तले रुल जाती थी।उस  विचारधारा का नाम था- 'चौधरी चरण सिंह'| आप इसी पल लिखावट पर बिखरें हुए इन शब्दों को और अपनी समझ को एक साथ संजोइए  और मेरे साथ इस आलेख के अंत (नीचे) तक चलिए क्यूँकि कुछ क्षणों तक उस शख़्स का मुआयना करेंगे, जिनके लिए मैं अपनी कलम उठाने पर मज़बूर हो गया। चौधरी चरण सिंह सिर्फ़ एक राजनीतिज्ञ, एक किसान नेता, एक पार्टी के अध्यक्ष और एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री का नाम ही नहीं था, चरण सिंह एक विचारधारा का भी नाम था। चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर, 1902 को ग़ाज़ियाबाद जनपद के नूरपुर गाँव (ब्रिटिश भारत) में हुआ था।  चौधरी चरण सिंह किसानों के नेता रूप में विख्यात थे। किसानों की ढाल बनकर उनके हक़ों के...

मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला साल ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा : शाह

सिद्ध भूमि न्यूज़ नेटवर्क :   भाजपा के शीर्ष नेताओं ने शनिवार को कहा कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा। पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि यह कार्यकाल अपने कड़े एवं बड़े फैसलों के लिए जाना जाएगा जिन्होंने देश की शक्ल-ओ-सूरत बदल दी।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने छह साल के कार्यकाल में कई “ऐतिहासिक गलतियों’ को सुधारा और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी जो विकास की राह पर अग्रसर है।  शाह ने ट्वीट किया, “ देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके दूसरे कार्यकाल के पहले साल पर मैं दिल से उन्हें बधाई देता हूं। यह ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा।”  नड्डा ने कहा कि मोदी ने अपनी दूरदर्शी नीतियों, निष्ठा और टीम भारत की भावना से देश के लोकतंत्र को नयी दिशा दी है और लोगों के कल्याण तथा देश का हित सरकार के प्रत्येक निर्णय में दिखता है।  भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार के अन्य सदस्यों को सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष पूरा...

बीस लाख करोड़ रूपये का पैकेज ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम : मोदी

सिद्ध भूमि न्यूज़ नेटवर्क :    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रूपये के पैकेज को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक ‘बड़ा कदम’ बताया और कहा कि देश अपनी अर्थव्यवस्था को वर्तमान संकट से उबार कर कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रही दुनिया के सामने एक मिसाल कायम करेगा।  प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर देशवासियों को लिखे खुले पत्र में कहा, ‘‘अभी हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज, इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। यह अभियान, हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, हमारे श्रमिक, हमारे लघु उद्यमी, हमारे स्टार्ट अप्स से जुड़े नौजवान, सभी के लिए, नए अवसरों का दौर लेकर आएगा।’’  कोरोना वायरस महामारी से पूरी दुनिया में उत्पन्न आर्थिक संकट का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में, आज यह चर्चा भी बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे उबरेंगी? लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित क...

नारीवाद: आशीर्वाद या आफत

रितिका चावला :      आपने हमेशा सुना होगा की बलात्कार के बाद एक लड़की ने आत्महत्या कर ली है, पर क्या आपने कभी ये सुना है की एक लड़के ने बलात्कार के झूठे आरोपों के कारण आत्महत्या कर ली है ? शायद आपने नहीं सुना होगा क्योकि हमारे देश में एक लड़की के साथ जब कोई घटना होती है तो मीडिया  और मानवाधिकार संघठन   इन्साफ के लिए विरोध पर उतर जाते है लेकिन लड़को को लेकर उनका रवैया हमेशा दोयम दर्जे का होता है । आज मैं आपसे नकली नारीवाद के बारे में बात कर रही हूँ।   नकली नारीवाद गलत समानताएं बनाता है: बलात्कार और दुर्व्यवहार के बारे में तो आप इसे सुनेंगे, "लेकिन नकली आरोपों के वक्त क्या?"  समस्या यह है कि बलात्कार जैसे आरोप देखते ही उस पर बिना तथ्यों की जांच पड़ताल किए चर्चा शुरू हो जाती है । इसके अलावा, जब आप यह सोचते हैं कि पूरी घटना को एक गलत आरोप के रूप में वर्गीकृत किया गया है, तो इस पर कोई भी विश्वास नहीं करता है। हालांकि अधिकतर मामलों मे  पुरुषों की तरफ से यौन उत्पीड़न होने की संभावना अधिक होती है, लेकिन हम ऐसा कभी नहीं सोचते कि झूठे आरोपों से पुरुषों...

चंद्रमा पर अपना टिकट प्राप्त करें !

सृष्टि, सीतामढ़ी (बिहार) : यूरोप के पहले चंद्र लैंडर के विकास पर ईएसए सदस्य राज्यों द्वारा 2019 में सहमति व्यक्त की गई थी और अब ईएसए चंद्रमा पर विज्ञान और रोबोट मिशन के लिए आपके विचारों की तलाश कर रहा है। इस दशक के अंत में एक एरियन 64 रॉकेट पर लॉन्च करने के लिए सेट करें और नियमित रूप से चंद्रमा पर लौट आएं, बड़ा लैंडर चंद्र सतह पर विज्ञान और रोबोटिक्स के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान करेगा और आपका मिशन पहले में से एक हो सकता है। नासा के आर्टिसिस कार्यक्रम के लिए तीसरे यूरोपीय सेवा मॉड्यूल का निर्माण शुरू करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले ईएसए की एड़ी पर विचारों के लिए चर्चा गर्म है। यह मॉड्यूल अंतरिक्ष यान को चलाएगा जो अगले अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा तक ले जाएगा। यूरोपीय नेतृत्व वाले बड़े चंद्र लैंडर कार्यक्रम चंद्रमा को स्वायत्त पहुंच प्रदान करते हैं, कौरौ में यूरोप के स्पेसपोर्ट से 1.5 टन सामग्री पहुंचाते हैं, फ्रेंच गयाना - यह मोटे तौर पर एक दरियाई घोड़े का वजन है। एसा कार्यक्रम, जिसे वर्तमान में यूरोपीय लार्ज लॉजिस्टिक्स लैंडर या ईएल 3 के रूप में जाना जाता है, को विभिन्न प्रकार क...

कौन कहता हैं कि शहर में अखबार बिकता हैं, यहाँ तो ढोंग व झूठ का फसाद बिकता है !

हिमांशु सिंह,औरंगाबाद, बिहार:-:    90 के दशक के लिए अखबार के लिए जो उत्सुकता होती थी वो लाजवाब होती  थी ,गांव में अखबार  पढ़ने वाले बुद्धिजीवी काका,बाबा,चाचा की तरह होते थे, और उन्हें सुनने वाले कई लोग, पर 21 वी सदी में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के विशेष माध्यम यानी अखबार (खासकर हिंदी के) को लेकर हमारी गंभीरता दिन-प्रतिदिन खत्म होती जा रही हैं।  खासकर उत्तर भारत की हिंदीपट्टी को  विकास,रोजगार पर्यावरण,समानता, संस्कृति, नारी सशक्तिकरण, एकीकृत समाज के बजाए धर्म, जाति, संप्रदायवाद, राजनैतिक  पक्षपात, अगड़ा, पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक , सांप्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष जैसे मुद्दों में झौकने में अखबारों का भी बड़ा योगदान हैं । हर अखबार का अपना एक खास एजेंडा होता है और वह एक खास विचारधारा से प्रेरित होते हैं, इसी कारण इनकी निष्पक्षता हमेशा शक के दायरे में रहती हैं। फिर भी मीडिया के तमाम नए विकल्पों के बीच आज भी अखबार दस्तावेज सरीखे माने जाते हैं, पर इसका  गिरता स्तर समाज के लिए चिंतनीय हैं।  डिजिटल मीडिया के उल-जुलूल भ्रामक और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एकतरफ...

अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से सभी रिश्ते किये ख़त्म, अब दूसरे संस्थानों को दी जाएगी अनुदान की राशि

श्रेय आर्या :    शुक्रवार देर रात को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से यह घोषणा करके बताया कि अमेरिका ने अपने सभी प्रकार के नाते डब्ल्यूएचओ के साथ तोड़ दिए हैं। ट्रम्प की तरफ से आरोप लगाया गया है कि डब्ल्यूएचओ ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए सभी  पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं। दरअसल इसके पीछे एक बड़ी वजह है चीन और डब्ल्यूएचओ के बीच बढ़ती नज़दीकियां। कोरोना महामारी के कारण अमेरिका में बड़ी संख्या में मौतें हो रही हैं सबसे ज्यादा कोरोना के मामले भी अमेरिका में ही दर्ज किए जा रहे हैं। जिसके कारण ट्रम्प ने डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली सहायता राशि पर भी रोक लगा दिया था।  रिपब्लिकन के नेता ने  कहा कि "अमेरिका इस राशि को दुनिया भर में तत्काल और सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकता की पूर्ति करने वाले अन्य संगठनों को देगा।" इसी मौके पर ट्रंप ने यह भी कहा कि वह अमेरिका और चीन के बिगड़ते संबंधों को लेकर जल्द ही कुछ फैसले अवश्य लेंगे, ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि चीन को संक्रमण के पैदा होते ही विश्व बिरादरी को अवगत करा देना चाहिए था।  साथ ही यह भी कहा कि "हम चीन पर एक सम्मेलन क...

कोविड-19 : लोगों पर डिसइंफेक्टेंट का छिड़काव: प्रभावी या हानिकारक?

आयुषी बिष्ट/दिल्ली : कोविड-19 के चलते, एक रोकथाम विधि जो सभी देशों ने आमतौर पर अपनाई है, वह सड़कों, दीवारों पर और कुछ मामलों में मनुष्यों पर डिसइंफेक्टेंट  का छिड़काव है।  नई दिल्ली के लाजपत नगर क्षेत्र में घर जाने के लिए बसों के बाहर कतार में लगे प्रवासियों पर डिसइंफेक्टेंट का छिड़काव किया गया था। बरेली में प्रवासियों पर डिसइंफेक्टेंट दवा का छिड़काव हुआ। यही नहीं, कई अन्य शहरों में, लोगों पर डिसइंफेक्टेंट  का छिड़काव किया जा रहा है, और अब कुछ कार्यालयों के बाहर भी लोगों को प्रवेश करने से पहले इन रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है। इससे 2 बड़ी चिंताएँ खड़ी होती हैं- 1. क्या ये रसायन लोगों के लिए हानिकारक हैं? 2. कोरोनावायरस को मारने में ये रसायन कितने प्रभावी हैं? 16 मई, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने COVID-19 के संदर्भ में पर्यावरणीय सतहों की सफाई और कीटाणुशोधन पर एक दस्तावेज़ जारी किया।  डब्ल्यूएचओ का कहना है कि छिड़काव अप्रभावी हो सकता है।  वास्तव में यह आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए खतरा है।  डब्ल्यूएचओ डिसइंफेक्टेंट  को घर के अंद...

रील लाइफ के बाद अब रियल 'पैडमैन' बने अक्षय कुमार :

धैर्या बत्रा :  कोरोना वायरस के कहर के बीच रील लाइफ के बाद अब रियल लाइफ में भी ‘पैडमैन’ बनकर जरूरतमंद महिलाओं की मदद कर रहे हैं। दरअसल अक्षय जरूरतमंद महिलाओं को सैनिटरी पैड देने की मुहिम से जुड़े हैं। अक्षय कुमार समर्पण नाम की एनजीओ के साथ मिलकर अब हर रोज मुंबई में जरूतमंद महिलाओं को 10,000 सैनिटरी पैड्स उपलब्ध कराएंगे। अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर ट्वीट भी किया है और सभी के इस मुहिम से जुड़ने अपील की है। उन्होंने लिखा, एक अच्छे काम के लिए आप लोगों के सपोर्ट की जरूरत है। कोविड में पीरियड्स नहीं रुक जाते, मुंबई की जरूरतमंद महिलाओं को पैड्स मुहैया कराने में मदद करें, हर डोनेशन मायने रखता है। इस मुहिम के जरिए मुंबई, बंगलुरु, दिल्ली, जोधपुर, लातूर और उज्जैन जैसी जगहों पर भी सैनिटेशन किट्स बांटी जा रही हैं। अब इसी पहल में अक्षय कुमार के साथ भूमि पेडनेकर भी शामिल हो चुकी हैं।  Attachments area

नीली -पीली पत्रकारिता से गुलाबी होते मंसूबे

ऋषभ अग्रवाल ,वंशिका सक्सेना,चंदन कुमार:      " खींचों न कमानों को,न तलवार निकालों, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो" ये पंक्तियां पत्रकारिता के प्रभाव  को   आज भी  इंगित करता है ।  पत्रकारिता जन-जन तक सूचना, शिक्षा एवं मनोरंजन परोसने की विधा है। इंदिरा गांधी का कहना था कि पत्रकारिता जनसेवा है, इसका परम लक्ष्य,ख़बरों को एकत्र करना,उन्हें छापना, प्रसारित करना ,लोगों को अधिक से अधिक जानकारी देकर उन्हें अच्छे तरीके से जांच और निर्णय लेने में सहायता प्रदान करना है।जाने माने पत्रकार प्रभास जोशी मानते थे कि 'कार्यपालिका, न्यापालिका, विधायिका और प्रेस में यदि पत्रकार चौथा खंभा है तो पत्रकार होने के नाते उसका अधिकार और कर्तव्य है कि वो तीनों खंभो पर पैनी नज़र रखे | ।पत्रकार या पत्रकारिता को समाज का दर्पण कहा जाता है ,चूंकि ऐसा माना जाता है कि पत्रकार समाज के विकृत अंगों को उजागर करता है  साथ ही साथ समाज की   भलाई के लिए महती भूमिका निभाता है |  । भारत पत्रकारिता का हस्तिनापुर माना जाता रहा है। लेकिन आज हस्तिनापुर का सिंघासन खत...

सरकार की योजनाएं किसानों के लिए महज दंतकथा

हर्षित श्रीवास्तव :- उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मूल आधार कृषि है , लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। अन्य क्षेत्रों की तुलना में बात करें तो प्रदेश की आर्थिक विकास में कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। आज भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे अहम भूमिका निभाने के बावजूद  सबसे ज्यादा गरीब एवं उपेक्षित  किसान ही हैं। आज हमारे अन्नदाता अपने अधिकारों के लिए सड़को पर उतर रहे हैं फिर भी इन्हे सरकार से जो सुविधाएं मिलने चाहिए, नहीं मिल पा रही है ,केवल कागजों पर सारी योजनाएं सफल होती दिख रही हैं । यह राज्य देश के विकास में सबसे  ज्यादा योगदान देने वालों में से एक है  | ,इस राज्य में 29% कृषक तथा  30.3% कृषि श्रमिक हैं । इस वक़्त उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कई योजनाएं  किसानों के विकास के  लिए चलाये  जा  रहें हैं  |  आईये थोड़ा विस्तार पूर्वक इन योजनाओं पर नज़र डालते है।   किसान आसान किस्त योजना, फरवरी 2020, :  यूपी आसान किस्त योजना के तहत, किसान किश्तों में अपने बकाया ट्यूबवेल बिजली बिलों का भुगतान कर सकते हैं।  उत्त...

टीम इंडिया का विदेश दौरा !

प्राची , दिल्ली  :    इंडिया का ऑस्ट्रेलिया के साथ टी-20  सीरीज का शेड्यूल तय हो गया है। पहला क्रिकेट मैच 11 अक्टूबर को ब्रिसबेन में होगा , दूसरा टी-20 14 से 17 अक्टूबर को खेला जायेगा। साथ ही कहाँ  जा रहा है की टी-20  वर्ल्ड कप टूर्नामेंट 18 अक्टूबर से 15 नवंबर में होंगे। इसके बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के 4 मैचों की टेस्ट  सीरीज आरम्भ होगी। भारतीय टीम अपना पहला डे-नाईट  टेस्ट 11 दिसंबर को एडिलेड में खेला जायेगा। कोरोना  का प्रभाव जहाँ पुरे विश्व में है वही क्रिकेट पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलता है, कोरोना के कारण इंडिया के खिलाड़िओ को दौरे के दौरान खुद को 14 दिन आइसोलेट करना पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट के सीइओ ने कहा है की हालत हमारे हाथ में नहीं है फाइनल शेड्यूल में बदलाव भी होने की सम्भावना है और इन सीरीज में ज़्यादा अंतराष्ट्रीय मैच करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी।   दोनों देशो के बीच मेलबर्न में बॉक्सिंग डे टेस्ट भी खेला जायेगा,इसके बाद सिडनी में  न्यू ईयर टेस्ट भी खेला जायेगा। क्रिसमस में अगले दिन खेले जाने वाला मैच ब...

30 साल बाद आखिर फिर से लौट आई यह कौन सी मुसीबत....?

तनु शर्मा नई दिल्ली, :  वक़्त ने कुछ इस तरह से करवट ली है मानो मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं I अभी कोरोना का कहर कम ही नहीं हुआ था की एक और मुसीबत सामने आ खड़ी है I यह बहुत तनावपूर्ण बात है कि टिड्डियों ने भारत में आक्रमण कर दिया है। एक तरफ कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं और दूसरी  ओर यह आफत I ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति प्रतिशोध के भाव में है, उसने मानव जाति  को हर जगह से घेर लिया है I हमारा देश 30 साल बाद टिड्डी  दल का हमला महसूस कर रहा है I यह हमला शुरू हुआ था अफ्रीका से फिर यह यमन आया उसके बाद ईरान और पाकिस्तान में तबाही मचाते हुवे यह अब भारत आ पहुँचा है। इस हमले को लेकर जनवरी माह में ही यूएन ने चेतावनी दे दी थी। इसने खेती को काफी बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुँचाया है, बात करें सिर्फ पाकिस्तान के आंकड़ों की तो वहां पर अब तक कुल 6 बिलियन डॉलर का नुकसान किसानों को हो चुका है। किसान कोरोना के प्रकोप से वैसे ही परेशान थे की अब इसने उनकी मुसीबत और भी बढ़ा दी है I पाकिस्तान के काफी किसानो का कहना है यह टिड्डी  दल के आक्रमण से हम भूखे ही मर जायेंगे I ख...

एकता ने किया खुलासा जल्द आएगा नागिन 5, नागिन 4 को कहा बाय बाय

विपिन, नई दिल्ली। एकता कपूर के चर्चित टीवी शो नागिन के चौथे सीजन को लेकर बीते कुछ दिनों से दर्शक संशय में हैं। सोशल मीडिया पर अफवाह है कि जल्द ही नागिन सीजन 4 बंद हो जाएगा। वहीं, कहा ये भी जा रहा है कि अब इसके बाद कोई भी शूट नहीं होगा। लेकिन अब खुद एकता कपूर ने सामने आकर खुलासा किया है  नागिन 4 की समाप्ति जल्द होगी और उनकी योजना नागिन 5 को तुरंत वापस लाने की है। एकता कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वह नागिन 4 के अंतिम 4 एपिसोड शूट करेंगी और ये काफी धमाकेदार होंगे। अपने इस वीडियो में एकता कहती हैं, मुझसे नागिन 4 के बारे में कई बार पूछा गया, तो मैं एक बार सबको बता देती हूं कि 'नागिन 4' का एक बेहतरीन अंत होने वाला है क्योंकि एक अंत की शुरुआत करने के लिए किसी चीज को बीच में से शुरू नहीं किया जा सकता। तो,हम ;नागिन  को खत्म कर रहे हैं और फिर तुरंत ही नागिन 5पर काम शुरू करेंगे। एकता ने इस धारावाहिक के कलाकारों में निया शर्मा, जैसमीन भसीन, अनीता हसानंदानी और विजेंद्र कुमेरिया का शुक्रिया अदा किया। साथ ही उन्...

उत्तराखंड विकास की उल्टी गंगा और बढ़ते भूतिया गांव

आयुषी बिष्ट/दिल्ली : जब भी उत्तराखंड में कोई त्रासदी या फिर उसकी आशंका पैदा होती है तो हमेशा की तरह फिर वही सवाल हमें चिंता में डालता है कि इस पहाड़ी इलाके का विकास आखिर किस तरह से हो रहा है? क्या हमने पिछली त्रसिदियों से कुछ सबक लिया है? इसका उत्तर अक्सर हमें 'ना' में ही मिलता है। केदारनाथ त्रासदी के बाद जिस तरह से केदारनाथ घाटी में पुनर्निर्माण हुआ है वह आंख खोलने के लिए काफी है। उत्तराखंड राज्य को बने 19 वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा के शासन में इस राज्य ने 8 मुख्यमंत्री देखे और इस लिहाज से यह कहना गलत नही होगा कि इनके कार्यकाल में किसी और चीज का रिकॉर्ड भले ही ना बना हो लेकिन भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड जरूर बना है। उत्तराखंड राज्य के गठन के लिए जब लोगों ने आंदोलन किया तो इसके पीछे लोगों की आकांक्षा यही थी कि जब यह राज्य बनेगा तो उसका विकास यहां की स्थानीय जरूरत तथा भौगोलिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक विशेषताओं को ध्यान में रखकर होगा। लेकिन इन 19 वर्षों में हमने यही देखा है कि यहां की सरकार के पास इस पहाड़ी राज्य के विकास का कोई रोड मैप नही है, बल्कि यहां का विकास बि...

वीरता थी उसमें कूट कूट, वह था भारत का समर्पित पूत "सावरकर"

वंशिका सक्सेना :     28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक शहर के पास छोटे से गांव भागूर में इस क्रांतिकारी का जन्म हुआ था| इनके पिता का नाम दामोदर सावरकर और माता का नाम राधाबाई था| उस समय भारत पर अंग्रेजों का पूरी तरह से कब्जा था| ऐसा कहा जाता है की बचपन से ही इनकी मां इन्हें महाभारत, रामायण, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह जी की प्रसिद्ध और साहस से भरपूर कहानियां सुनाती थीं| शायद यही कारण था कि सावरकर में बचपन से ही वीरता घर कर गई थी| सावरकर हमेशा से ही उत्तम श्रेणी के लेखक और श्रेष्ठ वक्ता थे| 1900 में मित्र मेले की शुरूआत इन्होंने ही की थी| इस मेले में भारतीय परंपरा के अनुसार मनाए जाने वाले सारे त्योहारों का आयोजन किया जाता था| शिवाजी फेस्टिवल, गोविंद जयंती से लेकर गणपति उत्सव तक सारे भारतीय संस्कृति से जुड़े त्योहारों को बड़ी धूम धाम से मनाया जाता था| भारतीय संस्कृति से असीम प्रेम करने वाले सावरकर का मानना था कि इन सारे आयोजनों से भारतीयों में न सिर्फ एकजुटता बढ़ेगी बल्कि अपनी संस्कृति के बारे में लोग जानेंगे और साथ ही इस बात से भी अवगत होंगे कि भारत का इतिहास कि...

ब्लैक होल टकराव के लिए ब्रह्मांडीय खोज जारी है

सृष्टि, सीतामढ़ी (बिहार) : मोनाश विश्वविद्यालय में एआरसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर  ग्रेविटेशनल वेव डिस्कवरी (ओजीग्राव) के पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता जिंगजियांग झू के नेतृत्व में  एक नए अध्ययन ने हमारे यूनिवर्स में सुपरमेसिव ब्लैक होल का पता लगाने के लिए एक नया  तरीका विकसित किया।  हमारे ब्रह्मांड में प्रत्येक आकाशगंगा के केंद्र में एक सुपरमैसिव ब्लैक होल रहता है - एक ब्लैक होल जो कि हमारे सूर्य के द्रव्यमान का लाखों से अरबों गुना बड़ा है। बड़ी आकाशगंगाओं को एक  साथ विलय करने वाली छोटी आकाशगंगाओं से इकट्ठा किया जाता है, इसलिए ब्रह्मांड में  सुपरमैसिव ब्लैक होल की टक्कर आम होने की उम्मीद है। लेकिन सुपरमेसिव ब्लैक होल का  विलय मायावी है: अब तक उनके अस्तित्व का कोई निर्णायक सबूत नहीं मिला है। इन विलय को  देखने का एक तरीका अंतरिक्ष और समय के कपड़े में गुरुत्वाकर्षण तरंगों-तरंगों के उत्सर्जन के  माध्यम से है। सुपरमेसिव ब्लैक होल की एक दूर की विलय जोड़ी गुरुत्वाकर्षण तरंगों का  उत्सर्जन करती है क्योंकि वे एक दूसरे के चारों ओर सर्पिल हैं। चूंकि ब्लैक ह...

इस लॉकडाउन के दौरान बहुत अच्छी नींद नहीं आ रही है? यहाँ बिल्कुल सामान्य है

आयुषी विष्ट :   यदि यह लॉकडाउन आपके स्लीपिंग पैटर्न के साथ खिलवाड़ कर रहा है तो घबराएं नहीं, यह बिल्कुल सामान्य है।  क्या आप अपने सोने के पैटर्न में अंतर देख रहे हैं?  क्या आपको लगता है कि आप जितना सोते थे उससे कम सो रहे हैं?  क्या आपको लगता है कि कुछ गलत है?  क्या आप इसके लिए लॉकडाउन को दोष दे रहे हैं? बहुत सारे सवाल आपके दिमाग में हो सकते हैं। इन सवालों से घबराए नहीं, गहरी सांस लें क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह से सामान्य है। विशेषज्ञों के अनुसार, लॉकडाउन के अलावा, सामाजिक दूरी और घर से काम करने से आपके नींद चक्र में परेशानी हो सकती है। अब, उस समय को फिर से याद करें जब कोई लॉकडाउन नहीं था। आप जिम, कार्यालय, बाजार, पार्टियों, बैठकों और मूल रूप से, जहाँ भी आप चाहते थे, जाते थे।  इसलिए, इसमें बहुत सारी शारीरिक और मानसिक गतिविधियाँ शामिल थीं।  हालाँकि, अब आप तो बहुत कुछ करने के लिए घर पर नहीं हैं और यहां तक ​​कि अगर आप घर से काम कर रहे हैं, तो आपकी शारीरिक गतिविधि प्रतिबंधित है - परिणामस्वरूप इससे नींद में खलल पड़ता है।  कम सोने ...

कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए जुटे देश के 30 ग्रुप

डॉली गर्ग :  कोरोना  वायरस के खिलाफ जो विश्व की लड़ाई है उसे वैक्सीन के माध्यम से ही जीता जा सकता है जिसमें भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। देश में तीन तरह के टेस्ट विकसित हो चुके हैं जबकि चौथे टेस्ट की भी पूरी तैयारी है। उनमें से एक टेस्ट आईआईटी दिल्ली ने विकसित किया है और एक चित्रा इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार कि ओर से इसकी जानकारी दी गई है। भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के विजय राघवन ने कहा कि देश में 30 ग्रुप है जो करोना की वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बहुत रिस्की प्रोसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर कोई वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं ना कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए देना जरूरी है क्योंकि वैक्सीन की क्वालिटी  और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जा सके। उन्होंने कहा कि वैक्सीन 10-15 साल में बनती है और इसकी लागत 200 मिलियन डॉलर के करीब आ...

सरकारी योजनाओं से दूर हूँ साहब, हाँ मैं मजदूर हूँ साहब !

हिमांशु सिंह-औरंगाबाद, बिहार:- मजदूर हुँ साहब जब भी घर लौटा, साथ लेकर आया पिता के लिए धोती,माँ के लिए साड़ी, पत्नी के लिए रॉलगोल्ड की चूड़ियाँ, बहन के लिए मोती वाला सलवार सूट,बेटे के लिए चाबी वाला मोटर गाड़ी, नई कमीज व बुशर्ट,बेटी के लिए गुड़ियां व झालर वाला फ्रॉक, भाई के लिए रेंजर साइकिल के रुपए, भाई के लिए सीरियल में दिखने वाली साड़ियां, पास-पड़ोस के लिए छेना की मिठाईया।...पर इस बारी उसका सारा अरमान टूट गया व लेकर इस दफ़े ये सब कुछ नही लाया।लाया तो आँखों मे बेहिसाब आँसू, पाव में छाले, भूख व प्यास से बिभोर हुए ओठ, धूल से भरा हुआ चेहरा और भी बहुत कुछ,आया भी तो खुद को समान के गठरी के भाँति ट्रक में लदकर आया,खून से लथपथ पाँव से सड़क को पेंट कर आया,साइकिल पर बैठ भूख से बेहाल जीवन व मौत की धुरी पर पैंडल मार आया।और हर पैंडल के साथ सोच रहा था कि देशहित के सम्मान में कुछ करने को मौका मिला हैं और अब  सरकार भी यही चाहती है कि हम आत्मनिर्भर बने |       क्या सरकार यही आत्मनिर्भरता चाहती हैं ! ? क्या सरकार के खजाने में गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है ?  इस 20 लाख करोड़ ...

आखिर क्या है चीन के ओछी राजनीति की वजह ?

श्रेय आर्या:    डोकलाम विवाद के बाद एक बार फिर से चीन भारत को सीमा पर आंख दिखाने लगा है। चीन की सेना ने पिछले दिनों में कई बार वास्तविक नियंत्रण रेखा में घुसपैठ करने की कोशिश की है। पर सवाल ये उठता है कि इस घुसपैठ के पीछे आखिर असली वजह क्या है? इस तरह से चीन आखिर साबित क्या करना चाहता है? दरअसल चीन की इस छटपटाहट के पीछे वजह है विश्व बिरादरी का उसके ऊपर पड़ता प्रभाव और भारत का लगातार उसके गैर-अधिकृत हिस्से पर निर्माणकार्य का विरोध। पिछले ही दिनों भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन में कार्यकारिणी बोर्ड के अध्यक्ष का पद संभाला है, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य महासभा ने जिम्मेदारी के तौर पर यह फैसला लिया कि कोरोनावायरस के जन्म की हकीकत के लिए एक स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन किया जाएगा।  शुरू में जांच की बातों को लेकर चीन ने आनाकानी तो बहुत की पर 110 देशों की सहमति एवं दबाव के बाद आखिर वह जांच को तैयार हो ही गया। भारत, अमेरिका, यूरोपीय देश एवं ऑस्ट्रेलिया समेत कई  आर्थिक महाशक्तिओं ने एक स्वर में इसकी मांग रखी है। ऐसे सवाल भी सामने आ रहे हैं आखिर क्यों चीन से शुरू हुए इस वायरस का ...

रामगोपाल वर्मा की फ़िल्म 'कोरोना वायरस' का ट्रेलर हुआ रिलीज

धैर्या बत्रा : कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया थम सी गई है। आम आदमी से लेकर बॉलीवुड सेलेब्स तक लॉकडाउन की वजह से अपने घरों में कैद हैं। इसी बीच फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा ने इस खतरनाक महामारी पर फिल्म बना डाली है।‍ जिसका नाम 'कोरोना वायरस' है। इस फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज कर दिया गया है। रामगोपाल वर्मा इस फिल्म के प्रोड्यूसर हैं और अगस्त्य मंजू ने इसे डायरेक्ट किया है। यह फिल्म तेलुगु में बनी है। फिल्म का ट्रेलर चार मिनट से ज्यादा का है। इसमें अगस्त्य मंजू ही लीड रोल निभा रहे हैं। इस फिल्म को श्रेयस ईटी एप पर रिलीज किया जाएगा।  रामगोपाल वर्मा ने ट्वीट करते हुए कहा कि 'ये लीजिए कोरोना वायरस फिल्म का ट्रेलर। इस स्टोरी के बैकड्रॉप में लॉकडाउन है और ये फिल्म भी लॉकडाउन में ही शूट हुई है। मैं साबित करना चाहता था कि कोई आपका काम नहीं रोक सकता है ना ही भगवान और ना कोरोना।  फिल्म के ट्रेलर में एक परिवार की कहानी दिखाई गई है। ट्रेलर में देखा जा सकता है कि न्यूज से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह कोरोना का खौफ है। फिल्म में ट्विस्ट तब आता है जब घर में मौजूद लड़की को खांसी होने लगती है।...

कोविद -19 संकट: भारतीय बैंकों को ताजा पूंजी में 20 बिलियन डॉलर की जरूरत ’

ईशा सिंह :     क्रेडिट सुइस ने उम्मीद की है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक 13 अरब डॉलर के लिए सरकार को फिर से तैयार करने के लिए डायल करेंगे। जोखिम बढ़ने और रेटिंग घटने से तेजी से बढ़ने की आशंका बैंकों के लिए परिसंपत्ति की गुणवत्ता के तनाव से है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जोखिम बढ़ने और रेटिंग घटने की रफ्तार बढ़ने से बैंकों के एसेट क्वालिटी स्ट्रेस में इजाफा होगा। महामारी के कारण भारतीय बैंकों को परिसंपत्ति-गुणवत्ता के मुद्दों पर ज्वार करने के लिए $ 20 बिलियन की अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी, क्रेडिट सुइस ने बुधवार को एक रिपोर्ट में कहा।  निवेश बैंक ने लॉकडाउन के मद्देनजर और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा दी गई तीन महीने की मोहलत के विस्तार के मद्देनजर अपनी क्रेडिट लागत का अनुमान 20-60% बढ़ा दिया।  निजी बैंकों का टियर 1 पूंजी अनुपात 13% पर स्वस्थ है, और उनके मजबूत पूर्व प्रावधान लाभप्रदता के साथ युग्मित है, यह 4% अतिरिक्त क्रेडिट लागत को अवशोषित करने के लिए पर्याप्त है। "हालांकि, स्थगन के तहत खुदरा ऋण के 30% और कॉर्पोरेट पुस्तक 'बीबीबी' के 20-40% या नीचे जहां पु...

आंवला - एक इम्यूनिटी बूस्टर

आयुषी बिष्ट/दिल्ली : एक मजबूत इम्यून सिस्टम हमेशा सब की  प्राथमिकता होनी चाहिए और अब दुनिया भर में फैली हुई महामारी के साथ, यह अब और अधिक महत्वपूर्ण है।  एक मजबूत इम्यून सिस्टम वायरस के खिलाफ बचाव का पहला कदम है, और ऐसा करने का सबसे आसान तरीका एक स्वस्थ आहार है। एक ऐसा स्वस्थ और संतुलित आहार, जो पोषक तत्वों से भरपूर है, हमारे शरीर को बेहतर बनाने के लिए सबसे अच्छा दांव है।  आंवला, जिसे भारतीय गूसबेरी भी कहा जाता है, इम्यूनिटी को बढ़ावा देने और बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है। आंवले में क्रोमियम होता है जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है।  आप जानते हैं कि हृदय हमारे शरीर का एक  महत्वपूर्ण अंग है जो कोरना वायरस से प्रभावित हो सकता है। इस वजह से आंवला दिल के स्वस्थ आहार के लिए सबसे अच्छा है।  आंवला में विभिन्न एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो शरीर को बेअसर करने में मदद कर सकते हैं और इस तरह आपको कई बीमारियों से बचा सकते हैं।  आंवला में एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं जो आपके सिस्टम को डिटॉक्स करने में मदद कर सकते हैं और यहाँ तक कि मु...

पीपीई किट के अंदर घुटता डॉक्टरों का दम

तनु शर्मा नई दिल्ली, ना कोई दर्द ना कोई आराम बस ज़िन्दगी देश के नाम ....... जहाँ एक ओर धीरे-धीरे कोरोना लोगो की ज़िन्दगी छीनने में लगा हुआ  है, वहीं कुछ योद्धा सुरक्षा कवच की तरह सब कुछ भूल कर लोगों को बचाने में लगे हुए हैं I अनेक तकलीफों का सामना करने के बावजूद लोगों की ज़िंदगी बचाने के लिए, वो वीर की तरह कोरोना के खिलाफ एड़ी चोटी का जोर लगाकर लड़ रहे हैं। I कई दिनों तक  अपने परिवार वालो से  न मिल पाने का ग़म तो है पर फिर भी दिन-रात काम करते जा रहे हैंI यहाँ तक की पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) किट उनके लिए बचाव का एकमात्रा जो साधन था वो भी उनके लिए इतनी गर्मी में समस्या बनती जा रही है I सिंथेटिक पदार्थ से बनने के कारण ये किसी भी प्रकार से हवा को अंदर नही जाने देता जिससे पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो जाता है। नतीज़न सभी स्वास्थ्यकर्मी बेचैनी और घबराहट के शिकार होने लगें है I पुरे दिन मास्क लगाने से चेहरे पर दाग पड़ता जा रहा है, गला सुख जाता है, घुटन तक महसूस होती है पर फिर भी ज़िम्मेदारी ऐसी की पानी तक नहीं पी सकते हैं। वक़्त भी इस तरह से कहर बरपा रहा है मानो प्रकृति भी हर तर...