रितिका चावला : आपने हमेशा सुना होगा की बलात्कार के बाद एक लड़की ने आत्महत्या कर ली है, पर क्या आपने कभी ये सुना है की एक लड़के ने बलात्कार के झूठे आरोपों के कारण आत्महत्या कर ली है ? शायद आपने नहीं सुना होगा क्योकि हमारे देश में एक लड़की के साथ जब कोई घटना होती है तो मीडिया और मानवाधिकार संघठन इन्साफ के लिए विरोध पर उतर जाते है लेकिन लड़को को लेकर उनका रवैया हमेशा दोयम दर्जे का होता है । आज मैं आपसे नकली नारीवाद के बारे में बात कर रही हूँ। नकली नारीवाद गलत समानताएं बनाता है: बलात्कार और दुर्व्यवहार के बारे में तो आप इसे सुनेंगे, "लेकिन नकली आरोपों के वक्त क्या?" समस्या यह है कि बलात्कार जैसे आरोप देखते ही उस पर बिना तथ्यों की जांच पड़ताल किए चर्चा शुरू हो जाती है । इसके अलावा, जब आप यह सोचते हैं कि पूरी घटना को एक गलत आरोप के रूप में वर्गीकृत किया गया है, तो इस पर कोई भी विश्वास नहीं करता है। हालांकि अधिकतर मामलों मे पुरुषों की तरफ से यौन उत्पीड़न होने की संभावना अधिक होती है, लेकिन हम ऐसा कभी नहीं सोचते कि झूठे आरोपों से पुरुषों का भी मानसिक बलात्कार हो रहा है। अभी हाल ही में "बॉयज लॉकर रूम" का केस आया जिसमें एक ट्विटर यूजर ने 3 मई को ‘ बॉयज लॉकर रूम ’ नाम के एक इंस्टाग्राम चैट ग्रुप के बारे में ट्वीट किया, इस ट्वीट में यूजर ने बताया कि इंस्टाग्राम ग्रुप में सैंकड़ों साउथ दिल्ली के लड़के हैं, जो कथित रूप से अवयस्क लड़कियों के फोटो शेयर करते हैं यूजर ने कहा कि ग्रुप में लड़कियों को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता है और 'गैंगरेप' का प्लान किया जाता है। जब इस ग्रुप में एक नया लड़का जुड़ा तो उसने अपनी मित्र को यह बताया जिसके बाद सोशल मीडिया पर आशना शर्मा नामक यूजर ने इस ग्रुप को उजागर किया। उसने लिखा, मुझे अपनी जिंदगी में इतना ज्यादा गुस्सा कभी नहीं आया। उसने सोशल मीडिया पर इस ग्रुप के कुछ स्क्रीनशॉट्स को शेयर करते हुए लिखा, “दक्षिण दिल्ली के 17-18 साल की उम्र के लड़कों का एक ग्रुप है, जिसका नाम ‘ब्वॉयज लॉकर रूम है, जहाँ कम उम्र की लड़कियों की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें आपत्तिजनक बनाया जा रहा था। मेरे स्कूल के दो लड़के इसका हिस्सा हैं।” लड़की ने इस दौरान जिन तस्वीरों को शेयर किया था, उन पर लिखे कमेंट देखकर ये अंदाजा लगाया जा सकता था कि ग्रुप के सदस्य गैंगरेप की योजना बना रहे थे और उस पर चर्चा कर रहे थे।
इसके बाद गुरुग्राम की डी.ल.फ फेज 5 के कार्ल्ट्न एस्टेट सोसायटी में मानव सिंह नामक 17 साल के एक नाबालिग ने 11वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। ये मामला सेक्टर 53 थाना क्षेत्र का है। मृतक शहर के नामी स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। लड़के ने आत्महत्या करने से पहले कोई सुसाइड नोट भी नहीं छोड़ा | लड़के के माता-पिता का कहना है की "5 मई 2020 की शाम को मेरे बेटे का एक दोस्त जो उसी सोसायटी में रहता है , जो मेरे बेटे का बैचमेट भी है, मुझे कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में सूचित किया, जो 4 मई, 2020 की रात को 10:30 बजे से 11:30 के बीच ट्रांसफर की गयीं थीं। जिसने मेरे बेटे को आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने के लिए प्रेरित किया,था जिसका सम्बन्ध बॉयज लॉकर रूम से है। मुझे बताया गया कि भावलीन कौर नाम की एक लड़की, जिसका हमें उम्र और पता भी नही मालूम है, उसने मेरे बेटे पर यौन शोषण के झूठे और कल्पनाशील आरोपों वाली एक कहानी पोस्ट की। उस लड़की को इस तथ्य के बारे में पूरी तरह से पता था कि इंस्टाग्राम की सभी तक पहुँच है और इसलिए बड़े पैमाने पर मेरे बेटे को सार्वजनिक रूप से शर्मनाक और तीव्र मानसिक उत्पीड़न देने के लिए तथा उसकी सामाजिक छवि को छिन्न-भिन्न करने के लिए आरोप लगाया । जो कि बाद में सार्वजनिक हो भी गए और फिर उसके दोस्तों द्वारा उसे सूचित किया गया। मुझे यह भी बताया गया कि उक्त पोस्ट को देखने के बाद, मेरे बेटे को उसके फोन पर धमकियाँ भी मिलने लगीं। पूर्वोक्त सभी घटनाएँ सामूहिक रूप से मेरे पुत्र के लिए अपार कष्ट, लज्जा, भय और असहनीय चिंताओं का कारण बनीं
मानव सिंह ने आत्महत्या का प्रयास किया क्योंकि भावलीन कौर ने उसके खिलाफ बलात्कार के फर्जी आरोप लगाए। कोई भी मीडिया या बुद्धिजीवी उसके मानवाधिकारों की बात नहीं करेगा, क्योंकि यहां एक लड़के की मृत्यु हो गई । अगर इस मामले में एक लड़की की मौत हो जाती तो अब तक विरोध प्रदर्शनों द्वारा सभी सीमाओं को पार कर जाते । हमारे देश में सभी लोगों को बलात्कार के मामले में न्याय करने की जल्दी है, यहां तक कि यह जाने बिना कि व्यक्ति दोषी है या नहीं। उनके अनुसार लड़का हमेशा गुनेहगार ही होता है,अब चाहे फिर सबूत और गवाह झूठे ही क्यों ना हो फिर भी सब उन पर विश्वास कर लेते हैं और बिना सही जांच किये लड़को को सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है। फिर वह लड़का किसी भी व्यक्ति के सामने अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर पाता हैं | अगर ऐसे ही चलता रहा तो समाज को विकृत होने से कोई नहीं बचा पायेगा |
