तनु शर्मा नई दिल्ली,
ना कोई दर्द
ना कोई आराम
बस ज़िन्दगी देश के नाम .......
जहाँ एक ओर धीरे-धीरे कोरोना लोगो की ज़िन्दगी छीनने में लगा हुआ है, वहीं कुछ योद्धा सुरक्षा कवच की तरह सब कुछ भूल कर लोगों को बचाने में लगे हुए हैं I अनेक तकलीफों का सामना करने के बावजूद लोगों की ज़िंदगी बचाने के लिए, वो वीर की तरह कोरोना के खिलाफ एड़ी चोटी का जोर लगाकर लड़ रहे हैं। I कई दिनों तक अपने परिवार वालो से न मिल पाने का ग़म तो है पर फिर भी दिन-रात काम करते जा रहे हैंI यहाँ तक की पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) किट उनके लिए बचाव का एकमात्रा जो साधन था वो भी उनके लिए इतनी गर्मी में समस्या बनती जा रही है I सिंथेटिक पदार्थ से बनने के कारण ये किसी भी प्रकार से हवा को अंदर नही जाने देता जिससे पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो जाता है। नतीज़न सभी स्वास्थ्यकर्मी बेचैनी और घबराहट के शिकार होने लगें है I पुरे दिन मास्क लगाने से चेहरे पर दाग पड़ता जा रहा है, गला सुख जाता है, घुटन तक महसूस होती है पर फिर भी ज़िम्मेदारी ऐसी की पानी तक नहीं पी सकते हैं। वक़्त भी इस तरह से कहर बरपा रहा है मानो प्रकृति भी हर तरह से इनकी परीक्षा ले रही हो। ऐसी निःस्वार्थ सेवा के बावजूद इन्हें लोगों द्वारा मार और अनादर भी सहन करना पड़ रहा। जो सब कुछ भूल कर सिर्फ इंसानियत के नाम पर हमे बचा रहे हैं, उनके साथ इस तरह का व्यवहार करना कहीं से भी उचित नहीं है। कहते है कि डॉक्टर भगवन का रूप होते है, लेकिन आज तो उनके साथ भी बहुत बुरा व्यवहार हो रहा है। अपनी तरफ से अगर हम कुछ कर नहीं सकते तो कम से कम उनके साथ ऐसा बर्ताव तो न करे, जिससे उनके हौसले में कमी आये, क्योंकि आखिरकार उनका भी एक परिवार है जो उनके इंतजार में पलके बिछाए बैठा है |
