श्रेय आर्या: डोकलाम विवाद के बाद एक बार फिर से चीन भारत को सीमा पर आंख दिखाने लगा है। चीन की सेना ने पिछले दिनों में कई बार वास्तविक नियंत्रण रेखा में घुसपैठ करने की कोशिश की है। पर सवाल ये उठता है कि इस घुसपैठ के पीछे आखिर असली वजह क्या है? इस तरह से चीन आखिर साबित क्या करना चाहता है? दरअसल चीन की इस छटपटाहट के पीछे वजह है विश्व बिरादरी का उसके ऊपर पड़ता प्रभाव और भारत का लगातार उसके गैर-अधिकृत हिस्से पर निर्माणकार्य का विरोध। पिछले ही दिनों भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन में कार्यकारिणी बोर्ड के अध्यक्ष का पद संभाला है, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य महासभा ने जिम्मेदारी के तौर पर यह फैसला लिया कि कोरोनावायरस के जन्म की हकीकत के लिए एक स्वतंत्र जांच कमेटी का गठन किया जाएगा। शुरू में जांच की बातों को लेकर चीन ने आनाकानी तो बहुत की पर 110 देशों की सहमति एवं दबाव के बाद आखिर वह जांच को तैयार हो ही गया। भारत, अमेरिका, यूरोपीय देश एवं ऑस्ट्रेलिया समेत कई आर्थिक महाशक्तिओं ने एक स्वर में इसकी मांग रखी है। ऐसे सवाल भी सामने आ रहे हैं आखिर क्यों चीन से शुरू हुए इस वायरस का प्रभाव अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में ज्यादा दिखा? शायद इसी खुन्नस की वजह से वह सीमा-विवाद को हवा देकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने खुले तौर पर "बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव" का विरोध किया है जिसकी बुनियादी ढांचे के तौर पर चीन कई देशों में निर्माण के कार्य कर रहा है। इन देशों में चीन इस स्तर पर निवेश कर देता है कि वह देश कर्ज के तले दबकर प्रशासनिक नियंत्रण भी चीन को सौंप देते हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण है श्रीलंका का महत्वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह। फिलहाल कहने मात्र को लोकतांत्रिक देश चीन में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की बैठक चल रही है जिस पर पूरे विश्व की नजर बनी हुई है। इस बैठक में आने वाले साल भर के लिए चीन की रणनीतियों को लेकर रूपरेखा तय की जाएगी, तथा साथ ही साथ चीन के रक्षा बजट पर भी घोषणाएं होंगी। पूरे विश्व की नजर बनी हुई है कि इस बार चीन अपने रक्षा बजट में कितना इजाफा करता है, गौरतलब है कि पिछले साल की बैठक में उसने 2050 तक दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य, आर्थिक एवं तकनीकी ताकत बनने का लक्ष्य रखा था। इस वक्त भारत की ताकत हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है क्वॉड देशों (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं जापान का समूह) के रिश्तो में आती प्रगति को देखकर चीन तिलमिला सा गया है। इसीलिए वह बार-बार भारत के बढ़ते रुतबे को चोट पहुंचाने की कोशिश करता रहता है। वर्तमान में चल रहा सीमा तनाव भी कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है।
सिद्ध भूमि न्यूज़ नेटवर्क:: शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय का 59वाँ वार्षिकोत्सव 29 जून 2020 को आयोजित किया गया। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष यह समारोह ऑनलाइन माध्यम के द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रॉय फाउंडेशन के संस्थापक श्री संजीव रॉय आमंत्रित थे। उन्होंने इस अकादमिक सत्र के पुरस्कृत सभी छात्रों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा - “कोरोना के इस संकटग्रस्त अनिश्चित दौर में हमें अपनी क्षमताओं को पहचानना होगा। अपनी अंतर्निहित क्षमताओं द्वारा नये अवसरों का सृजन करना होगा। उन्होंने कहा कि वो यंग इंडिया में नई संभावनाओं को देखते हैं। जब यंग इंडिया की बात होती है, तब पूरा भारत इस देश के युवाओं की ओर हसरत भरी निगाहों से देखता है।" इस अवसर पर शिवाजी कॉलेज के पूर्व छात्र और दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एन. हरिहरन ने अपने विशिष्ट वक्तव्य में कहा कि “ हमें भविष्य की संभावनाओं के प्रति अपने दिलो दिमाग को खुला रखना चाहिए। अपने कॉलेज के दिनों की स्...
