डॉली गर्ग : कोरोना वायरस के खिलाफ जो विश्व की लड़ाई है उसे वैक्सीन के माध्यम से ही जीता जा सकता है जिसमें भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। देश में तीन तरह के टेस्ट विकसित हो चुके हैं जबकि चौथे टेस्ट की भी पूरी तैयारी है। उनमें से एक टेस्ट आईआईटी दिल्ली ने विकसित किया है और एक चित्रा इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार कि ओर से इसकी जानकारी दी गई है। भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के विजय राघवन ने कहा कि देश में 30 ग्रुप है जो करोना की वैक्सीन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बहुत रिस्की प्रोसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर कोई वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं ना कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए देना जरूरी है क्योंकि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जा सके। उन्होंने कहा कि वैक्सीन 10-15 साल में बनती है और इसकी लागत 200 मिलियन डॉलर के करीब आती है। हमारी कोशिश है कि इसे एक साल में बनाया जाए। इसलिए एक वैक्सीन पर काम करने की जगह हम लोग एक ही समय में 100 से अधिक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। प्रोफेसर ने कहा कि वैक्सीन बनाने की कोशिश तीन तरह से हो रही है। एक तो हम खुद कोशिश कर रहे हैं, दूसरा बाहर की कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, तीसरा हम लीड कर रहे हैं और बाहर के लोग हमारे साथ काम कर रहे हैं। दवा बनाने के लिए स्टूडेंट्स का हैकाथान किया जा रहा है जिससे जल्दी दवा बनाने की होड़ होगी। इसके बाद आईसीएमआर इसकी जांच करेगा।
सिद्ध भूमि न्यूज़ नेटवर्क:: शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय का 59वाँ वार्षिकोत्सव 29 जून 2020 को आयोजित किया गया। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष यह समारोह ऑनलाइन माध्यम के द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रॉय फाउंडेशन के संस्थापक श्री संजीव रॉय आमंत्रित थे। उन्होंने इस अकादमिक सत्र के पुरस्कृत सभी छात्रों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा - “कोरोना के इस संकटग्रस्त अनिश्चित दौर में हमें अपनी क्षमताओं को पहचानना होगा। अपनी अंतर्निहित क्षमताओं द्वारा नये अवसरों का सृजन करना होगा। उन्होंने कहा कि वो यंग इंडिया में नई संभावनाओं को देखते हैं। जब यंग इंडिया की बात होती है, तब पूरा भारत इस देश के युवाओं की ओर हसरत भरी निगाहों से देखता है।" इस अवसर पर शिवाजी कॉलेज के पूर्व छात्र और दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एन. हरिहरन ने अपने विशिष्ट वक्तव्य में कहा कि “ हमें भविष्य की संभावनाओं के प्रति अपने दिलो दिमाग को खुला रखना चाहिए। अपने कॉलेज के दिनों की स्...