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02 फरवरी 2014

बांटो और राज करो पर अमल करती है कांग्रेसः मोदी

 मेरठ 02 फरवरी 2014 कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि कांग्रेस बांटो और राज करो की नीति पर अमल करती है और उसने ही यह जहर बोया है। मोदी, राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी मां सोनिया गांधी ने उन्हें बताया कि सत्ता जहर है। मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद अधिकांश समय तक कांग्रेस पार्टी ही सत्ता में रही।
मेरठ में विजय शंखनाद रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कांग्रेस के साथ उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी निशाना साधा और लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए जनादेश मांगते हुए स्वयं को लोगों के पैसे की रखवाली करने वाला ‘चौकीदार’ बताया। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा कि उन्होंने गुजरात को दंगा मुक्त बनाया और अगर उनकी पार्टी सत्ता में आयी तो उत्तर प्रदेश को भी दंगा मुक्त बनायेंगे।
मोदी ने अपने संबोधन के दौरान सोनिया गांधी के ‘जहर की खेती’ जुमले का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस ने ‘बांटो और राज करो’ के आधार पर शासन किया और उसने ही यह जहर बोया है। इस संदर्भ में मोदी ने तेलंगाना मुद्दे का जिक्र किया और कहा कि जिस तरह से कांग्रेस इस मुद्दे से निपटी, उसने पूरे राज्य को इस आग में झोंक दिया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के समम तीन राज्य छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड का गठन हुआ और उस समय सभी जगह त्यौहार का माहौल था।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम और मेरठ का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान रोटी और कमल का संदेश आगे बढ़ाया गया था और अब एक बार फिर 2014 में रोटी के लिए ‘कमल’ लेकर आना है। मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने देश में 1857 और लोगों के त्याग एवं बलिदान की गाथा को भुला दिया, क्योंकि कांग्रेस वर्षों से झूठ फैला रही है कि स्वतंत्रता संग्राम में उसका ही योगदान है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा, ‘‘सोनिया गांधी ने राहुल से कहा कि सत्ता जहर है। पिछले 60 वर्षों में कौन सबसे अधिक समय तक सत्ता में रहा? किसके पेट में सबसे अधिक जहर गया? कौन जहर फैला रहा है? कौन जहर बो रहा है? केवल कांग्रेस जहर बो रही है।’’ उन्होंने कहा कि लोग कांग्रेस से जवाब मांगते हैं कि किसान क्यों आत्महत्या कर रहे हैं और वह जवाब देती हैं कि लोग जहर बो रहे हैं।
सोनिया पर मोदी का प्रहार कांग्रेस अध्यक्ष की कर्नाटक की उस रैली का जवाब है जिनमें उन्होंने मोदी और भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति और जहर की खेती करने तथा सत्ता के लिए हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। करीब एक घंटे के भाषण में उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली जाना खबर नहीं है बल्कि बिजली आना खबर है। लोगों में यह चर्चा का विषय है कि किस दिन और कब बिजली आई। गुजरात में 365 दिन बिजली रहती है। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा कि राम मनोहर लोहिया को मानने वाले लोगों को किसानों की रत्ती भर भी चिंता नहीं है। गन्ने के किसानों का हाल देखकर काफी चिंता होती है। 60 लाख से अधिक गन्ना किसानों को पेटभर रोटी नसीब नहीं हो पा रही है। चीनी मिलें पैसा नहीं दे रहीं हैं, मिलों तक गन्ना नहीं पहुंच रहा है और मिलें नहीं चल रही हैं।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि पिछले दिनों नेताजी ने कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार का कल्याण बजट गुजरात से ज्यादा है। ‘‘मेरा सवाल यह है कि मेरे यहां कम बजट में लोग खुशहाल हैं जबकि उत्तर प्रदेश में ज्यादा बजट के बावजूद लोग परेशान क्यों हैं?’’ उत्तर प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए मोदी ने कहा कि प्रदेश में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति काफी खराब है और बहन, बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। इन्हें भी जीने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का नाम बदलकर समाज विरोधी पार्टी कर दिया जाना चाहिए। ‘‘महिलाएं घर से निकलने में भय महसूस करती हैं। मुलायम सिंहजी, अखिलेश सिंहजी कम से कम यह सुनिश्चित करें कि महिलाएं सम्मान से जी सकें।’’
मोदी ने कहा कि मेरठ में हर सप्ताह दंगे जैसी स्थिति पैदा होती है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले गुजरात में ऐसी ही स्थिति थी। अब गुजरात दंगा मुक्त है और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। मोदी ने चुनौती दी कि अगर समाजवादी पार्टी प्रतिस्पर्धा करती है तो रैलियां आयोजित करने की बजाए कानून एवं व्यवस्था, कल्याण, किसानों के मुद्दे पर करे। रालोद नेता अजीत सिंह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके नागर विमानन मंत्री होने के बावजूद क्षेत्र में एक भी हवाई अड्डा नहीं है। आम आदमी पार्टी का नाम लिये बिना मोदी ने कहा कि दिल्ली को ग्लोबल सिटी के रूप में विकसित होना चाहिए लेकिन यहां अरुणाचल प्रदेश के विधायक के एक बेटे की हत्या होती है और अफ्रीकी महिलाओं के साथ बदसलूकी की जाती है। इन घटनाओं से सिर शर्म से झुक जाता है।

सीट बंटवारे का मुद्दा 10 दिन में सुलझा लेंगेः पवार

नई दिल्ली :02 फरवरी 2014: राकांपा प्रमुख शरद पवार ने आज कहा कि कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे का मुद्दा अगले 10 दिन में ‘‘सौहार्दपूर्ण’’ ढंग से सुलझा लिया जाएगा। उनका यह बयान दोनों दलों के बीच तनाव और लोकसभा चुनाव के लिए कड़ी सौदेबाजी के संकेतों के बीच आया है। केंद्रीय कृषि मंत्री पवार ने यह बात तब कही है जब पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा था कि कांग्रेस के ‘‘विलंब’’ के चलते राकांपा का धैर्य खत्म हो रहा है और ‘‘विकल्प खुले हैं।’’ खबर है कि केंद्रीय मंत्री पटेल ने कांग्रेस को तीन दिन की समयसीमा दी थी, लेकिन पवार ने आज किसी ‘‘अल्टीमेटम’’ की बात से इनकार किया।

पवार ने ट्विटर पर कहा कि कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे का मुद्दा अगले 10 दिन में सुलझा लिया जाएगा। सौहार्दपूर्ण तरीके से बातचीत चल रही है, प्रफुल्ल पटेल ने कांग्रेस को कोई अल्टीमेटम नहीं दिया है। पूर्व के एक ट्वीट में पवार ने कहा कि देश को एक स्थिर सरकार की आवश्यकता है और राकांपा की कांग्रेस के साथ ‘‘मित्रवत तरीके से’’ चर्चा हो रही है। उन्हें लोकसभा चुनावों में अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) का कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता। राकांपा कांग्रेस नीत संप्रग का दूसरा सबसे बड़ा घटक है। वह केंद्र में पिछले 10 साल से संप्रग का हिस्सा है। महाराष्ट्र में 48 लोकसभा सीटें हैं।

मुद्दे ही मुद्दे गूंजते रहे संसद में, कामकाज में आयी गिरावट

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय मंत्रियों अश्विनी कुमार और पवन कुमार बंसल के इस्तीफे की मांग, 2 जी स्पैक्ट्रम, तेलंगाना, श्रीलंकाई तमिलों, लोकपाल आंदोलन, महंगाई और मुजफ्फरनगर दंगों समेत विभिन्न मुद्दे सालभर संसद के गलियारों में गूंजते रहे।इस साल दो बार ऐसा हुआ कि हंगामे के कारण संसद के सत्र को निर्धारित समय से कई दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।संसद का बजट सत्र दस मई की बजाय दो दिन पहले आठ मई को और शीतकालीन सत्र निर्धारित तारीख 20 दिसंबर से दो दिन पहले ही 18 दिसंबर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा।पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च के आंकडें बताते हैं कि पांच दिसंबर से शुरू होकर 18 दिसंबर को संपन्न संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में 94 फीसदी और राज्यसभा में 81 फीसदी समय हंगामे की भेंट चढ़ गया।बजट सत्र में हंगामे के कारण लोकसभा का 92 घंटे से अधिक का समय और राज्यसभा का भी 82 घंटे से अधिक का समय बर्बाद हुआ था।भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, केंद्रीय मंत्रियों अश्विनी कुमार और पवन कुमार बंसल के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बने गतिरोध के चलते संसद का बजट सत्र निर्धारित समय से दो दिन पूर्व अचानक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था।हंगामे के कारण बजट सत्र के दूसरे चरण का पूरा समय शोर शराबे की भेंट चढ़ कर व्यर्थ चला गया और इस दौरान केवल संवैधानिक रूप से आवश्यक वित्तीय कामकाज ही निपटाया जा सका। हंगामे के कारण 22 अप्रैल से शुरू हुए दूसरे चरण में एक दिन भी प्रश्नकाल नहीं चल सका।बजट सत्र के दो दिन पूर्व ही स्थगित किए जाने से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं किए जा सके। हालांकि बाद में सरकार इन्हें मानसून सत्र के दौरान पारित कराने में सपल रही । हंगामे के कारण इस चरण में लोकसभा का 92 घंटे से अधिक का समय और राज्यसभा का भी 82 घंटे से अधिक समय बर्बाद हुआ।अचानक सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किये जाने से खाद्य सुरक्षा विधेयक, भूमि अधिग्रहण विधेयक और बांग्लादेश से भूमि सीमा समभौते जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित नहीं कराया जा सका।जो एकमात्र कामकाज हुआ, वह वित्त विधेयक का पारित होना था।इससे बजट प्रक्रिया पूरी हो गयी।रेल बजट भी पारित हुआ लेकिन वित्त विधेयक और रेल बजट को बिना चर्चा के ही पारित कराना पडा और इस दौरान विपक्ष ने वाकआउट किया ।तीन महीने चलने वाले बजट सत्र की शुरूआत 21 परवरी को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किए जाने से हुई थी।22 मार्च को मध्यावधि अवकाश पर जाने से पूर्व संसद में आपराधिक कानून :संशोधन: विधेयक और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर सारगर्भित चर्चा हुई।संसद ने दिल्ली में एक युवती के साथ चलती बस में सामूहिक बलात्कार की जघन्य घटना की एक स्वर में निंदा की और एक कड़ा कानून पारित किया।सदस्यों ने संसद पर हमला मामले के दोषी अफजल गुरू को पांसी दिए जाने की निंदा करने वाले पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली द्वारा पारित प्रस्ताव को भी एकजुट होकर अस्वीकार किया।संसद ने सर्वसम्मति से पाकिस्तान से भारत के अंदरूनी मामलों से दूर रहने और चरमपंथी गतिविधियों तथा आतंकवादी तत्वों को समर्थन से परहेज करने को कहा। संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन ने खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण संबंधी ऐतिहासिक विधेयकों को पारित करने के साथ ही पेंशन विधेयक, लोक प्रतिनिधित्व संशोधन विधिमान्यकरण विधेयक और राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय विधेयक को भी मंजूरी प्रदान की। एक महीना लंबा लोकसभा का यह मानसून सत्र पांच अगस्त से शुरू हुआ था और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक सदन की बैठक 30 अगस्त तक चलनी थी लेकिन बाद में इसे एक सप्ताह बढाकर छह सितंबर तक कर दिया गया था।शीतकालीन सत्र में भी बजट सत्र के दूसरे चरण की कहानी दोहरायी गयी।संसद के दोनों सदनों की बैठकें निर्धारित तारीख से पहले ही 18 दिसंबर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गयी।पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 5 दिसंबर को शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर तक चलना था।शुरूआत से ही हंगामे के कारण दोनों सदनों में एक भी दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका।उपलब्धियों की बात करें तो विधायी कामकाज के तहत संसद ने केवल एक महत्वपूर्ण विधेयक लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयर्कं को पारित किया। (पूरी खबर के लिए क्लिक करें)

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