मोदी की ऐतिहासिक जीत
लोकसभा चुनाव 2014 कई मायनों में ऐतिहासिक रहा. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में रिकॉर्ड मतदान हुआ और जो नतीजे आए हैं वो भी पिछले कुछ रिकॉर्ड को तोड़ रहे हैं. 30 सालों में पहली बार किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। बीजेपी की अभूतपूर्व जीत से भारत में गठबंधन सरकारों का एक काल समाप्त हो रहा है. देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार और बहुत सारी अन्य समस्याओं के लिए गठबंधन धर्म को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है. अब बीजेपी को अकेले बहुमत देकर मतदाताओं ने छोटी क्षेत्रीय पार्टियों के पर कतरे हैं और उसे समस्याओं का हल करने के लिए खुला हाथ दिया है. लेकिन इसके साथ नरेंद्र मोदी की नई सरकार के साथ बहुत सारी उम्मीदें भी जुड़ गई हैं.
इस साल का चुनाव और मायनों में भी निर्णायक है. इस बार भारत के 81 करोड़ मतदाताओं में से 55 करोड़ लोगों ने मतदान में भाग लेकर रिकॉर्ड बनाया है. लोगों को इतनी बड़ी तादाद में पोलिंग बूथ पर लाने का श्रेय भी नरेंद्र मोदी को जाता है, जिन्होंने देहाती इलाकों में गांधी परिवार की परंपरागत लोकप्रियता का सामना करने के लिए अमेरिका जैसा चुनाव प्रचार किया, जिसमें राष्ट्रीय अभियानों के जरिए अनजाना उम्मीदवार भी अपने को गंभीर राजनेता के रूप में स्थापित करता है. हालांकि इसके लिए औद्योगिक घरानों के चंदों का बड़ा महत्व है, इस रणनीति की सफलता ने भारत को नए राजनीतिक विकल्प दिए हैं.
नई संसद के लिए मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को भारी बहुमत से जिताकर उससे अपनी उम्मीदें जोड़ दी हैं और सोनिया और राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी को उसकी गलतियों और भ्रष्टाचार के लिए बेरहमी से सजा दी है.
नरेंद्र मोदी की आंधी ने कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को उड़ा दिया है. बीजेपी अपने दम पर बहुमत हासिल कर चुकी है.
आठ बजे शुरू हुई मतगणना के दो-तीन घंटे बाद ही साफ होने लगा कि आम चुनावों में नरेंद्र मोदी की लहर नहीं बल्कि आंधी चली. जैसे जैसे मतगणना आगे बढ़ी बीजेपी की बढ़त बढ़ती चली गई. पार्टी को कुछ राज्यों को छोड़कर पूरे देश में मतदाताओं का भारी समर्थन मिला है.
शाम तक सामने आए नतीजों से साफ हो गया कि बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन एनडीए को करीब 340 सीटें मिलने जा रही हैं. अकेले बीजेपी 284 सीटें जीतती दिख रही है, यानी पार्टी को अकेले पूर्ण बहुमत मिल रहा है. 1984 के बाद यह पहला मौका है जब कोई पार्टी अकेले बहुमत हासिल कर रही है. बीजेपी 1947 के बाद बहुमत हासिल करने वाली पहली गैर कांग्रेसी पार्टी है.
2014 के नतीजे कांग्रेस के इतिहास के सबसे बुरे नतीजे हैं. भ्रष्टाचार, महंगाई, कुशासन और वंशवाद के आरोपों से घिरी पार्टी को 162 सीटों का नुकसान होता दिखाई पड़ रहा है. कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर सिमट रही है.पार्टी ने हार स्वीकार कर ली है. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हार की जिम्मेदारी ली है.
मतगणना के रुझान से शेयर बाजार भी झूम रहा है. मुंबई का सेंसेक्स 25,000 के पार हो गया है. रुपया भी मजबूत हुआ है. मई 2009 के बाद रुपया पहली बार 18 फीसदी उछला है.
बालकृष्ण मिश्र
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