अमेरिका हमारा स्वाभाविक वैश्विक सहयोगीः मोदी
न्यूयार्क: 26 सितंबर 2014अमेरिका को भारत का ‘‘स्वाभाविक वैश्विक सहयोगी’’ करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों की पूरक शक्ति का उपयोग दुनिया भर में लोगों के जीवन में बदलाव लाने के उद्देश्य से समावेशी और व्यापक आधार पर विकास के लिए किया जा सकता है। मोदी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के वैचारिक (ऑप-एड) पृष्ठ पर लिखा, ‘‘अमेरिका हमारा स्वाभाविक वैश्विक सहयोगी है। भारत और अमेरिका अपने साझा मूल्यों के स्थायी और सार्वभौमिक औचित्य को मूर्त रूप देते हैं।’’
उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय का समृद्ध होना वास्तव में भारत-अमेरिका साझेदारी की अंतर्निहित शक्ति का एक लक्षण, उद्यम कौशल को विकसित करने वाले माहौल के लिए संभावना और कठोर परिश्रम का प्रतिफल है।
अपनी पांच दिवसीय अमेरिका यात्रा के लिए न्यूयार्क आगमन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एकदूसरे की सफलता में भारत और अमेरिका की मूलभूत हिस्सेदारी और कई साझा हित जुड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारी साझेदारी की अनिवार्यता भी है- और एशिया एवं प्रशांत महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा तथा स्थायित्व लाने की दिशा में इसका विशेष महत्व भी होगा, साथ ही आतंकवाद और चरमपंथ जैसे अपूर्ण और तत्काल हल किए जाने वाले आवश्यक कार्यों, हमारी समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा, साइबर क्षेत्र तथा बाह्य अंतरिक्ष और वह सभी जिनका हमारे दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है।’’ मोदी ने लिखा, दुनिया भर में लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए भारत और अमेरिका की ताकत को समावेशी एवं व्यापक आधार पर प्रयोग किया जा सकता है। मोदी ने कहा, ‘‘यह वैश्विक तौर पर गतियमान क्षण है। मैं दोनों देशों के भाग्य को लेकर आश्वस्त हूं क्योंकि लोकतंत्र परिवर्तन का सबसे बड़ा और यदि सही परिस्थिति में हो तो, मानव जाति को विकसित होने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है।’’ उन्होंने बताया कि एक दूसरे के दृष्टिकोण के प्रति संवेदनशीलता और हमारी मित्रता के प्रति विश्वास के जरिए हम अपने समय की सबसे जरूरी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के अधिक समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयास करने का अवसर पा सकते हैं। मोदी ने दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने में तकनीक के योगदान को भी विशेष तौर पर रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आलेख में लिखा, ‘‘सूचना तकनीक में हमारी सामथ्र्य विशेष तौर पर आज के डिजिटल युग में नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण है। हमारा कारोबारी सहयोग समान राजनीतिक प्रणाली और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता और सहूलियत पर निर्भर करता है। शिक्षा, नवाचार और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अमेरिका भारत के लिए हमेशा प्रेरणा रहा है।’’ संयुक्त राष्ट्र महासभा में 27 सितंबर को संबोधन और न्यूयार्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डेन में 28 सितंबर को 18,000 भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करने के बाद मोदी वाशिंगटन रवाना होंगे, जहां वे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से पहली बार 29 सितंबर और 30 सितंबर को व्हाइट हाउस में मुलाकात करेंगे।
राकांपा के साथ गठबंधन की संभावना नहीं: भाजपा
मुंबई 26 सितंबर 2014शिवसेना के साथ 25 साल पुराना गठबंधन समाप्त करने के एक दिन बाद भाजपा ने शरद पवार नीत राकांपा के साथ महाराष्ट्र में 15 अक्तूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन की संभावना से आज इंकार किया। भाजपा महासचिव और राज्य प्रभारी राजीव प्रताप रूडी ने यहां कहा, ‘‘सवाल ही पैदा नहीं होता।’’ उन्होंने कहा, "भविष्य का गठबंधन क्यों होना चाहिए? मैं आपसे निश्चित रूप से कह सकता हूं कि हम अकेले ही जा रहे हैं। वे :कांग्रेस और राकांपा: चुनावों के बाद राज्य में अस्तित्वहीन होने वाले हैं।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यह एक असंवेदनशील तर्क और अगंभीर दलील है कि भाजपा चुनावों के बाद राकांपा के साथ गठबंधन करेगी। महाराष्ट्र की हालत के लिए कांग्रेस और राकांपा दोनों समान रूप से दोषी हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में भाजपा के चुनाव अभियान में प्रमुख भूमिका निभाएंगे, रूडी ने कहा कि प्रधानमत्री ‘‘संभवत: तीन अक्तूबर के बाद हमारे साथ :चुनाव अभियान के लिए: होंगे।" उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र नेतृत्व ने प्रधानमंत्री से यहां आने और अपना बहुमूल्य समय देने का अनुरोध किया है। रूडी ने कहा कि वह ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने खुद को उस ओहदे के लिए साबित किया है और वह पूरी दुनिया में भारत का चेहरा हैं।’’
शिवसेना-भाजपा गठबंधन के समाप्त होने के बारे में उन्होंने कहा, "शिवसेना से अलग होना अफसोसनाक था।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने गठबंधन का फैसला राज्य इकाई पर छोड़ दिया था। भाजपा नेता ने कहा कि महाराष्ट्र में पंच-कोणीय मुकाबला होगा। यह पूछे जाने पर कि राकांपा के सरकार से हट जाने के बाद महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन का क्या वह समर्थन करेंगे, रूडी ने कहा कि अगर कोई सरकार बहुमत खो देती है और मुख्यमंत्री पद छोड़ देते हैं तो सामान्य रूप से राष्ट्रपति शासन ही स्वाभाविक नतीजा होता है। लेकिन वह इस बारे में फैसला करने के लिए सही व्यक्ति या प्राधिकार नहीं हैं। यह पूछे जाने पर कि शिवसेना के बाद भाजपा नीत गठबंधन से कौन पार्टी हट सकती है, उन्होंने कहा, "यह सब अटकल हैं।’’