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12/01/2016

 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए'

'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए' का संदेश देने वाले युवाओं के प्रेरणास्त्रो‍त, समाज सुधारक युवा युग-पुरुष स्‍वामी विवेकानंद की आज जयंती है निश्चित ही उनकी जयन्ती से जुड़ा यह वर्ष उनके व उनकी वैचारिकी का वर्तमान सन्दर्भ में मूल्यांकन करने का एक स्वर्णिम अवसर है। देश में प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाया जाता है। परन्तु इस वर्ष 12 जनवरी, 2016 को उनकी 153वीं जयन्ती है। इस अवसर पर उनके वैचारिक जीवन से जुड़े प्रतिबिम्ब ही नहीं, बल्कि उनके उदात्त सिद्धान्तों का चित्रण भी वर्तमान की आधारपीठिका तैयार करते हुये भारत के भविष्य का भी प्रतिचित्र तैयार करेगा।
हमेशा जोश और जुनून से सराबोर रहने वाली युवा पीढ़ी ही देश का भविष्य है। देश की युवा शक्ति ही उसका सबसे बड़ा हथियार है। हरदम कुछ नया कर गुजरने की चाह रखना। नित नई-नई चुनौतियों का सामना करने तैयार रहना और संकल्प शक्ति ऐसी कि जो एक बार करने की ठान लें तो लाख मुश्किलें भी उसको बदल न पाएं|
 स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि ‘‘मेरी आशा युवाओं में है। इनमें से मेरे कार्यकर्ता आयेंगे।’’युवा शक्ति ने प्रतिसाद भी दिया और देश के लिये अपने आप को समर्पित कर दिया। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में सम्मिलित क्रांतिकारी हो या असहयोग के शांतिपूर्ण मार्ग से विरोध प्रदर्शन करने वाले देशभक्त हो दोनों ही ने स्वामी विवेकानन्द से प्रेरणा प्राप्त की। वर्तमान में भी भारत को पुनः उस जागरण की आवश्यकता है। शिकागों से लौटते ही रामेश्वरम के किनारे पर अपने सम्बोधन में स्वामी विवेकानन्द ने कहा था, ‘‘सूदीर्घ रजनी अब समाप्तप्राय सी दिखाई देती है। लम्बी काली रात टल गई अब उषा होने को है। यह सोया भारत जाग उठा है। केवल अन्धे देख नही सकते, विक्षिप्तबुद्धि समझ नहीं सकते कि यह सुप्त विराट जाग गया है। हिमालय से चल रही मंद शीतल लहर ने इस महाकाय को जगा दिया है। अपनी नियती को यह प्राप्त करके रहेगा। विश्व की कोई शक्ति इसे नहीं रोक सकती।’’
वर्तमान में एक ओर स्वामीजी की भविष्यवाणी सत्य होने के लक्षण दिखाई दे रहे है। देश की युवाशक्ति अनेक क्षेत्रों में नये नये कीर्तिमान गढ़ रही है। ज्ञान-विज्ञान, आर्थिक विकास, अंतरिक्ष तकनीक, संगणक, व्यापार आदि सब में भारतीय युवा पुनः अपने खोये गौरव को प्राप्त कर विश्व नेतृत्व की ओर अग्रसर हैं । भारत विश्व का सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाला देश बन गया है। इतना ही नहीं विश्व के सर्वाधिक अभियंता व चिकित्सक निर्माण करने का श्रेय भी हमें ही है। इसके साथ ही इतनी बड़ी कुशल व अकुशल श्रामिक संख्या भी और किसी देश के पास नहीं है। जनसंख्या में चीन भले ही हमसे आगे हो किंतु उसकी औसत आयु प्रौढ़ता की ओर है और 3 वर्षों में वहाँ कार्यबल इतना कम हो जायेगा कि वर्तमान उत्पादकता बनाये रखने के लिये भी उसे अन्य एशियाई देशों की सहायता लेनी होगी। आध्यात्मिक क्षेत्र में तो भारत का वर्चस्व सदा से ही रहा है।
किन्तु दूसरी ओर एक राष्ट्र के रुप में भारत की स्थिति बड़ी विकट है। देश चारों ओर से चुनौतियों से घिरा हुआ है। चीन व पाकिस्तान का आपसी गठजोड़ सामरिक रूप से भारत को चारों ओर से घेर रहा है। इसी समय हमारी प्रशासकीय व्यवस्था पूर्णतः चरमराई हुई दिखाई पड़ रही है। समाज में मूल्यों के ह्रास का संकट है। शासन द्वारा अल्पसंख्यकों के नाम पर चल रहा तुष्टीकरण का खेल फिर से विभाजन जैसे हालात पैदा कर रहा है। वर्तमान में  युवाओं के समक्ष सबसे बड़ी दिक्कत भ्रष्टाचार है| देश भ्रष्टाचार रूपी घने कुहरे से घिरा हुआ है ,चारो तरफ  लूट खसोट  मची  हुई  है  ,2जी ,कामनवेल्थ ,कोलगेट जैसे बहुत से घोटालों ने देश की रीढ़ को कमजोर कर दिया है | | युवाओं के हमदर्द होने का ढोंग करने वाले भाषणबाज मंच पर आकर माला धारण करते हैं और लच्छेदार भाषण देकर खूब तालियां बटोरते हैं, लेकिन अगर कुछ नहीं बदलता है तो वो है युवाओं की दुर्दशा। ऐसे में युवाओं को आगे आना होगा और “मेरा भारत महान”  की अवधारणा को सार्थक करना होगा क्योंकि वे ही देश के कर्णधार है और बड़ा परिवर्तन उन्हीं के द्वारा ही होना है
देश की राजनीति में जब तक 60% से 80% तक युवाओं की भागीदारी नहीं होगी तब तक न तो सत्ता बदलेगी न ही व्यवस्था बदलेगी। बुजुर्गों में जिन्होंने लम्बे अरसे से देश की प्रामाणिकता व पवित्रता से सेवा की है, उनका हम हृदय से सम्मान करते हैं। लेकिन आज 60% से 80% राजनीति में पुराने लोगों का कब्जा है और उनमें से ज्यादातर लोग एक हार्ड क्रिमनल की तरह काम कर रहे हैं और उनमें जो कुछ अच्छे-सच्चे हैं भी, तो वे थके हुये हैं या बार-बार उनके साथ धोखा हुआ है - वे ठगे गये हैं। उनसे अब बड़े परिवर्तन की उम्मीद हम नहीं कर सकते। युवाओं को अपने सपने पूरे करने के लिए ईमानदारी से अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करनी होगी
वोट की ताकत असीमित है, इसलिए युवा इस शक्ति का सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयोग करें और बेहतर भविष्य के लिए मतदान के माध्यम से ईमानदार और विकासपरक सोच वाले प्रतिनिधि को चुने तभी उनका और देश का भला होगा| अवसर व चुनौती के एकसाथ सामने है ऐसे समय देश के युवाशक्ति को सन्नध होना होगा। अपनी तरुणाई को ललकार कर शक्ति को जागृत करना होगा। युवा की परिभाषा ही बल से है। स्वामी विवेकानन्द युवाओं से आवाहन किया करते थे, ‘‘मुझे चाहिये लोहे की मांसपेशियाँ, फौलाद का स्नायुतन्त्र व वज्र का सा हृदय।’’ शारीरिक बल, मानसिक बल व आत्मबल तीनों से युक्त युवा ही स्वामी जी का कार्य कर सकता है। स्थान स्थान पर फिर आखाड़े लगें। बलोपासना को पुनः जगाने का प्रसंग है। जागों युवा साथियों अपनी कमर कस कर खड़े हो जाओ। माँ की सेवा के लिये सामर्थ्य जुटाओं!
----: बाल कृष्ण मिश्र

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