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10 जून 2016

                                          स्वच्छ भारत अभियान 

    राहुल प्रकाश :      'स्वच्छ भारत अभियान' एक ऐसी कोशिश है जो अगर पूरी तरह से सफल हो जाए तो भारत देश की कायापलट हो जाएगी, जो लोग विदेश घूम आते है तो उनका एक ही कहना होता है विदेश में क्या साफ-सफाई है भारत में तो ये कभी नहीं हो सकता । मैं पूछता हूँ क्यूँ नहीं हो सकता,विदेश मे हरएक लोग अपनी जिम्मेदारीयों को समझते है,वो अपने घर का कूड़ा-कचड़ा कूड़ेदान मे डालते है और यहाँ भारत मे लोग यही काम नहीं कर पाते वो अपने घर को साफ तो रख लेते है पर अपने पड़ोस मे कचड़ा फैला देते है । इसमें हमारी भी कुछ गलतियां है,हम पर्यापत संख्या मे कूड़ेदान नहीं रखते है, जिससे कि लोगों को सहुलियत हो। हम  तो स्वच्छ भारत अभियान का नारा तो लगाते हैं पर उसी कार्यक्रम मे अगर कुछ खाने-पीने को दिया जाए तो हम मे से कुछ लोग खा-पी कर कचड़ा वहीं फेंक देते है । हमारे यहाँ एक गौर करने वाली बात है कि जो लोग ज्यादा पढे लिखे(जमादार) है वो सफाई करने मे लगे है और पढें लिखे लोग गंदगी फैलाने मे लगे है ।

स्वच्छ भारत आंदोलन: भारत को स्वच्छ बनाने के लक्ष्य के साथ नई दिल्ली के राजघाट पर 2 अक्दूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा इस अभियान की शुरुआत हुई। इसका लक्ष्य है 2 अक्दूबर 2019 तक हर परिवार को शौचालय सहित स्वच्छता-सुविधा उपलब्ध कराना है, ठोस और द्रव अपशिष्ट निपटान व्यवस्था, गाँव में सफाई और सुरक्षित तथा पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी उपलब्ध हो। ये भारत के राष्ट्रपिता को उनके 150वें जन्मदिवस पर सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी। ये बहुत महत्वपूर्ण है कि इस अभियान को सफल बनाने के लिये प्रधानमंत्री स्वयं अग्रसक्रिय भूमिका निभा रहे है; राजघाट पर उन्होंने खुद सड़कों को साफ कर इस मुहिम की शुरुआत की।

जबकि, ये पहले ही निर्धारित कर दिया गया है कि ये अभियान केवल सरकार का कर्तव्य नहीं है बल्कि राष्ट्र को स्वच्छ बनाने की की जिम्मेदारी इस देश के सभी नागरिकों है । महात्मा गाँधी स्वच्छता के बहुत बड़े समर्थक थे। वे गंदी सड़कें, रास्ते, मंदिर और खास तौर से देश की हरिजन बस्ती के बारे में बहुत ज्यादा चिंतित रहते थे। दक्षिण अफ्रिका से लौटने के तुरंत बाद उन्होंने महसूस किया कि स्वच्छता और साफ-सफाई के मामले में भारत देश की स्थिति बहुत खराब है। गाँधी जी ने लोगों को प्रेरणा देने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली और व्यक्तिगत रुप से भारत को गंदगी मुक्त बनाने का फैसला किया।

4 फरवरी 1916 से पहले, बनारस हिन्हू विश्वविद्यालय के लोकार्पण कार्यक्रम में जनसमूह को संबोधित करते हुए, गाँधीजी ने स्वच्छता के महत्व को बताया और हर जगह फैली गंदगी और मैल को लेकर अपना दर्द तथा दुख व्यक्त किया। उन्होंने अपने विश्वनाथ मंदिर के दर्शन का उदाहरण दिया और उसके अंदर और चारों तरफ फैली गंदगी के बारे बताया। उन्होंने कहा ”क्या ये महान मंदिर हमारे चरित्र को नहीं बताता है ?” अपने दुख को व्यक्त करते हुए उन्होंने पूछा क्या अंग्रेजों के देश से चले जाने के बाद भी मंदिर गंदा और मैला रहेगा। इसलिये उनके लिये सफाई उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी राष्ट्र की आजादी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बुलावे पर ध्यान देते हुए कॉरपोरेट भारत ने भी इस अभियान को सफल बनाने के लिये उत्साह के साथ कदम आगे बढ़ाया।

अनिवार्य कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी के तहत स्वच्छता गतिविधियों में सार्वजनिक और निजी कंपनीयों को जोड़ा जा रहा है जो कि कंपनी अधिनियम 2013 के तहत कानूनी जरुरत है। सीएसआर एक क्रियाविधी है जिसके द्वारा कंपनियाँ पूरे समाज के भले कार्यों में पूँजी लगाती है।

हाल ही में बड़े कॉरपोरेट घराने जैसे एलएनटी, डीएलएफ, वेदांता, भारती, टीसीएस, अंबुजा सीमेंट, टोयोटा किरलोस्कर, मारुती, टाटा मोटर्स, कोका कोला, डॉबर्र, आदित्य बिरला, अदानी, इंफोसिस, टीवीएस और कई दूसरों के पास निश्चित किये गये बजट स्वच्छ भारत अभियान के लिये है। एक अनुमान के मुताबिक कॉरपोरेट सेक्टर के द्वारा 1000 करोड़ की कीमत के कई स्वच्छता परियोजनाएँ पाइपलाइन में है। दूर-दराज़ के गाँवों में शौचालय बनाने सहित इन परियोजनाओं में व्यवहार में बदलाव लाने के लिये कार्यशाला चलाना, कचरा प्रबंधन तथा साफ पानी और दूसरी चीजों में साफ-सफाई क्रिया-कलाप आदि है।

स्वच्छ भारत अभियान के लिये एक बोली में कॉरपोरेट्स धन को आमंत्रित करना, अभी हाल ही में सरकार ने ये फैसला लिया कि इस स्कीम में कॉरपोरेट भागीदारी को सीएसआर खर्चे में गिनती होगी। और बाद में इसे स्पष्ट करने के लिये कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने भी कंपनी अधिनियम के शेड्यूल 7 को संशोधित किया ये उल्लिखित करने के लिये कि स्वच्छ भारत कोष में योगदान सीएसआर के लिये योग्य होगा।

इसलिये, ना केवल सरकरी और निजी शख्स बल्कि कॉरपोरेट क्षेत्रक भी भारत को स्वच्छ बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे है। देश में रह रहे सभी नागरिकों के प्रयासों के द्वारा भारत को एक स्वच्छ भारत बनाने के लिये स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हुई। इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्पष्ट रुप से घोषित किया गया कि कोई भी इस कार्यक्रम में किसी भी समय सक्रिय रुप से भाग ले सकता है। उसे बस गंदी जगहों की एक तस्वीर लेनी है और इसके बाद उसे उस जगह की सफाई करने के बाद तस्वीर लेनी है और पहले और बाद की फोटो सोशल मीडिया वेबसाइटों जैसे फेसबुक, ट्वीटर आदि पर अपलोड कर देनी है जिससे इसी तरह का कार्य करने के लिये दूसरे आम लोग इससे परिचित और प्रेरित हो स्वच्छ भारत के दृष्टी को पूरा कर सके।

भारतीय जनता से भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा इस तरह की अपील के बाद ये भारत के लोगों द्वारा तेजी से शुरु हुआ। इस कार्यक्रम के आरंभ होने के दिन से ही लोग बहुत सक्रिय और प्रेरित हुए और इसको वैश्विक बनाने के लिये पहले और बाद की स्नैप लेकर सोशल मीडिया वेबसाइटों पर अपलोड कर उसी तरह शुरु किया गया। नरेन्द्र मोदी द्वारा ये भी कहा गया कि जो भी इस मुहिम को आगे बढ़ायेगा उसे सोशल मीडिया वेबसाइटों पर सरकरा द्वारा सराहा जायेगा। बॉलीवुड, टॉलीवुड, राजनीतिज्ञ, खेल, व्यापार उद्योग, आदि से जुड़े बहुत सारे प्रसिद्ध व्यक्तित्व जैसे आमिर खान, अमिताभ बच्चन, रितीक रोशन, सचिन तेंदूलकर, मृदुला सिन्हा जी, अनिल अंबानी, बाबा रामदेव, शशि थरुर, कमल हासन, प्रियंका चोपड़ा, एम.वेंकैया नायडु, अमित शाह, सलमान खान, तारक मेहता का उल्टा चश्मा की टीम और कई सारी हस्तियाँ अपने समयनुसार इस मुहीम से जुड़े तथा फेसबुक और ट्वीटर पर इससे जुड़ी तस्वीरें अपलोड की।

इसे स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय के छात्रों और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों के द्वारा भी किया जा रहा है। दैनिक रुटीन कार्य और दूसरे व्यवसायिक गतिविधियों में लगे देश के युवा भी कार्यक्रम में भाग लेते है तथा इसी तरह का कार्य करते है। सभी क्रिया-कलाप प्रसिद्ध व्यक्तित्व, विद्यार्थी तथा देश के युवा द्वारा समर्थित होता है और आम जन को इसमें सक्रियता से भाग लेने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है। अपने आस-पास के जगह को साफ और उत्तम करने के लिये हमें भारतीय होने के नाते अपने हाथों में झाड़ू लेने की जरुरत है।

ज्यादातर स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने ग्रुप कार्यक्रम में भाग लिया था तो हम क्यूँ पीछे है ? हमें भी इसमें पूरी सक्रियता से भाग लेना चाहिये। इस अभियान को सफल अभियान बनाने के लिये कई स्वतंत्र एप्लिकेशन प्रोग्राम डेवलपर ने मोबाईल तकनीक का इस्तेमाल कर कई मोबाईल एप्लिकेशन बनाए। मीडिया ने भी अपने लेख और खबर प्रकाशन के द्वारा इस अभियान को बढ़ावा दिया। इस अभियान की ओर लोगों को टाईम्स ऑफ इंडिया ने भी अपने लेख “फेसबुक को देशी कंपनी ने हराया ‘स्वच्छ एप्स रेस’ में” से प्रेरित किया। दूसरा प्रकाशित लेख है-“ये भारतीय एप बदल सकता है कैसे लोग अपनी सरकार से बात करें”।

2019 तक 100% खुले में शौचमुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये इस अभियान के तहत ठीक ढ़ंग से शौचालय बनाया जाना है जिसके लिये भारत सरकार द्वारा राष्ट्रव्यापी वास्तविक समय निगरानी की भी शुरुआत हुई है। लोगों को स्वच्छ भारत का महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाने के लिये एनआईटी राऊरकेला पीएचडी विद्यार्थीयों द्वारा स्वच्छ भारत पर एक लघु फिल्म बनाई गई है। हमें भी अपने हाथ इस मिशन के लिये जोड़ना चाहिये और इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण भाग समझना चाहिये। स्वच्छ भारत केवल एक का नहीं बल्कि सभी भारतीय नागरिकों की जिम्मेदारी है।

किसी ने सही कहा है कि"कोशिश करने वालों कि कभी हार नहीं होती" अगर हम सब मिलता के कोशिश करें तो भारत को साफ-सुथरे राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सक।


 मेक्सिको ने एनएसजी के लिए भारत का समर्थन किया

 10 जून 2016  | मेक्सिको सिटी। एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को आज मेक्सिको का अहम समर्थन मिला। यह समर्थन ऐसे समय में मिला है जब 48 देशों के गुट की बैठक होने वाली है। एनएसजी के सदस्यों को परमाणु प्रौद्योगिकी के निर्यात और इससे संबंधित व्यापार करने की अनुमति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो ने कई द्विपक्षीय एवं वैश्विक मामलों पर व्यापक वार्ता के बाद परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को देश के समर्थन की घोषणा की।

मेक्सिको के राष्ट्रपति ने मोदी के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मेक्सिको एनएसजी में भारत की सदस्यता का सकारात्मक एवं रचनात्मक रूप से समर्थन करता है।’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समर्थन के लिए मेक्सिको को धन्यवाद दिया और उसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक अहम साझीदार बताया। अपनी पांच दिवसीय यात्रा के अंतिम पड़ाव के तहत वाशिंगटन से आज यहां पहुंचे मोदी ने कहा, ‘‘हम क्रेता-विक्रेता के संबंध से आगे बढ़ना चाहते हैं और एक दीर्घकालिक साझीदारी करना चाहते हैं। हमने हमारे संबंधों को एक रणनीतिक साझीदारी में बदलने के लिए ठोस परिणामों का एक रोडमैप विकसित करने पर सहमति जताई है।’’

 
मोदी और नीतो ने इस वार्ता के दौरान व्यापार एवं निवेश, सूचना प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन एवं ऊर्जा समेत कई मामलों में द्विपक्षीय सहयोग गहरा करने के तरीकों पर बात की। मेक्सिको एनएसजी का एक अहम सदस्य है और एनएसजी में प्रवेश के लिए भारत की दावेदारी के लिए इसके समर्थन को महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। मोदी ने अमेरिका की यात्रा से पहले एनएसजी के एक अन्य अहम सदस्य स्विट्जरलैंड की यात्रा की थी। परमाणु प्रसार को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करने के तौर पर जाने वाले यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड ने परमाणु व्यापार क्लब में शामिल होने के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने की घोषणा की थी।
 
मेक्सिको और स्विट्जरलैंड के समर्थन को ऐसे समय में महत्वपूर्ण समझा जा रहा है जब चीन यह तर्क देकर एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध कर रहा है कि उसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मंगलवार को वांशिगटन में हुई वार्ता में भी इस मुद्दे पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। अमेरिका और एनएसजी के कई अन्य सदस्यों ने परमाणु अप्रसार के पिछले रिकॉर्ड के आधार पर भारत को समूह में शामिल किए जाने का समर्थन किया है। एनएसजी सर्वसम्मति के सिद्धांत के तहत काम करता है और यदि एक भी देश इसके खिलाफ मतदान करता है तो इसकी दावेदारी समाप्त हो जाएगी। भारत पिछले कई वर्षों से इस गुट का सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है और उसने 12 मई को इस संबंध में औपचारिक आवेदन दिया था।
 
एनएसजी परमाणु क्षेत्र संबंधी अहम मामलों को देखता है और उसके सदस्यों को परमाणु प्रौद्योगिकी का निर्यात करने और इसमें व्यापार करने की अनुमति है। इसकी सदस्यता से भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार करने में मदद मिलेगी। भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के आधार पर चीन की ओर से न चाहते हुए भारत का समर्थन करने के बाद एनएसजी ने असैन्य परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच के लिए वर्ष 2008 में भारत को विशेष छूट दी थी।


जानवरों को जानवरों मारने पर मेनका, जावड़ेकर आमने-सामने

 10 जून 2016  | केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने जानवरों को मारने की इजाजत देने के लिए आज पर्यावरण मंत्रालय पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हत्या की ‘लालसा’ को नहीं समझ सकतीं, लेकिन पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस कदम का यह कहते हुए बचाव किया कि फसलों को बचाने के लिए राज्यों के आग्रह पर यह किया जाता है। 

महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका का यह बयान हाल ही में बिहार में नीलगायों के मारे जाने के बाद आया है। उन्होंने इसे ‘अब तक का सबसे बड़ा नरसंहार’ करार दिया। इस विवाद के बाद विपक्ष ने आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार के भीतर कोई तालमेल नहीं है।

 मेनका ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ‘हर प्रदेश को लिख कर उन जानवरों की सूची प्रदान करने की इजाजत दे रहा है जिनको मारने के लिए केंद्र से अनुमति ली जा सके।’ उन्होंने कहा, ‘‘यह पहली बार हो रहा है। मैं जानवरों की हत्या के प्रति इस लालसा को नहीं समझ पाती हूं।’’
 
उधर, जावड़ेकर ने इस बात पर जोर दिया कि यह जानवरों की संख्या का ‘वैज्ञानिक प्रबंधन’ है और ‘खूंखार’ घोषित किए जानवरों को मारने की इजाजत विशेष इलाकों और समयावधि के लिए होती है। मेनका ने दावा किया कि केंद्र ने बिहार में नीलगाय, पश्चिम बंगाल में हाथी, हिमाचल प्रदेश में बंदर, गोवा में मोर और महाराष्ट्र के चंद्रपुर में जंगली सूअर को मारने की अनुमति दी। बिहार में नीलगायों को मारे जाने पर उन्होंने कहा कि यह उस वक्त हुआ जब किसी ग्राम मुखिया या किसानों ने इनको मारने का आग्रह नहीं किया था।
 
जावड़ेकर ने कहा, ‘‘मौजूदा कानून के तहत जब किसान बहुत अधिक समस्याओं का सामना करते हैं और उनकी फसलें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तथा जब राज्य सरकार प्रस्ताव भेजती हैं तो हम (मारने की) इजाजत देते हैं और राज्य सरकारों के एक विशेष इलाके और समयावधि संबंधी प्रस्ताव को अनुमति प्रदान करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह केंद्र सरकार का कार्यक्रम नहीं है। कानून ऐसा है।’’ विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार के भीतर आपसी तालमेल नहीं है।
 
जदयू प्रवक्ता आलोक अजय ने कहा, ‘‘मंत्रालयों के बीच तालमेल नहीं है। पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है। सभी मंत्रालय आपस में भिड़ रहे हैं। टीमवर्क का अभाव है।’’ राकांपा प्रवक्ता राहुल नरवेलकर ने कहा, ‘‘मंत्रालयों के बीच कोई सामंजस्य नहीं है, एक व्यक्ति उन पर चीजों को थोप रहा है। यह कुशासन की एक और मिसाल है।’’
 

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