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उपलब्धियों से भरे राजग सरकार के दो वर्ष


पीटीआई भाषा /अरूण जेटली
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार ने अपने दो वर्ष का कार्यकाल पूरा किया । अपने सम्पूर्ण कार्यकाल के मध्य तक पहुंचने वाली किसी भी सरकार के लिए यह सामान्य बात है कि वह अपने भविष्य की रूपरेखा को और मजबूती प्रदान करे । मोदी सरकार के लिए पहले दो वर्ष ‘स्लॉग ओवर’ की तरह थे जहां उसे तेजी से काम करना था।
यह सरकार एक विशेष तरह के माहौल में बनी थी । संप्रग सरकार ने नीतियां बनाने का काम ही छोड़ दिया था । वह ‘नीतिगत पंगुता’ के दौर की तरह था । वैश्विक और घरेलू निवेशक.. दोनों का भारत से विश्वास उठने लगा था। भारत उनके रडार से बाहर हो चुका था। घोटालों और अनैतिक कार्यो से सरकार की विश्वसनीयता बुरी तरह प्रभावित हो गई थी। प्रधानमंत्री का कार्यालय किसी भी मामले में अंतिम निर्णय करने वाला नहीं रह गया था । वर्ष 2014 के आम चुनाव के नतीजे आशा के अनुरूप ही थे । लोकसभा में निर्णायक बहुमत मिलने से नई सरकार के लिए फैसले लेना आसान हो गया । प्रधानमंत्री स्वभावत: निर्णायक व्यक्तित्व के हैं । ऐसे में प्रशासन चलाने का तरीका बदल गया ।
प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम ने देश में बदली हुई राजनीतिक और प्रशासनिक संस्कृति की शुरूआत की और यह दिखा दिया कि देश के केंद्र में एक साफ सुथरी सरकार बन सकती है जहां फाइलें स्वत: आगे बढ़ीं, विचौलिये बेरोजगार हो गये, विवेकाधिकार खत्म कर दिये गए । इन दो वर्ष के कार्यकाल में भारत नीतिगत पंगुता के दौर से उबर कर तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में तब्दील हो गया । संघीय प्रणाली को इतना सम्मान दिया गया जितना उसे पहले कभी नहीं मिला । प्रधानमंत्री ने अपनी मजबूत पकड़ के साथ देश को एक ऐसी सरकार दी जो पहले की सरकारों से भिन्न थी । भारत को निवेश की जरूरत थी । निवेश सभी आर्थिक गतिविधियों का शुरूआती बिन्दु है। संप्रग सरकार के दौरान बैंकों और निजी क्षेत्रों ने अपने दायरे से बाहर जाकर काम किया । इसलिए पिछले दो वषरे में अधिकतर निवेश बढ़े हुए सार्वजनिक खर्च या प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के तौर पर आया । निवेश मुख्यत: भारत के ढांचागत, ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्रों में किया गया । राजमार्ग क्षेत्र फिर से फलने फूलने लगा । देश के ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के लिए इस वर्ष पहले के मुकाबले तीन गुना अधिक राशि खर्च की गई । 25 नये क्षेत्रीय हवाई अड्डे तैयार किये जायेंगे । रेलवे को मजबूत किया जा रहा है। 400 प्रमुख स्टेशनों को आधुनिकतम बनाकर भारतीय रेलवे का कार्याल्प किया जायेगा । देश की छवि निखर जायेगी । देश को जितनी बिजली की जरूरत है उससे अधिक उसके पास उपलब्ध है। अतिरिक्त निवेश कर बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। तेल एवं गैस क्षेत्र में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में हालात सुधारने के लिए बिना बिजली वाले गांवों का विद्युतीकरण, ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने, ग्रामीण जल मल निकासी व्यवस्था, सबके लिए आवास, सिंचाई में अधिक निवेश, रोजगार गारंटी योजना के लिए धनराशि, ब्याज के जाल से किसानों को निकालने के लिये उनको रियायती दरों पर पूंजी की उपलब्धता जैसी योजनाएं शुरू की गईं ।
सामाजिक क्षेत्र में युगांतकारी योजनाएं लागू की गई । प्रधानमंत्री जनधन योजना विश्व में अब तक की सर्वाधिक व्यापक वित्तीय समायोजन की योजना है । आज हर भारतीय को बैंक में अपना खाता खोलने की सुविधा है। सब्सिडी को इस तरह तर्कसंगत बनाया गया है कि गरीबों और जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सके। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना से ऐसा बहुत सा पैसा बच रहा है जो अब तक उन लोगों को जा रहा था जो इसके हकदार नहीं थे, अब यह पैसा उन लोगों के पास पहुंच रहा है जो इसके हकदार हैं। सरकार ने व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए रियायती बीमा योजना, रोजगारपरक मुद्रा योजना, महत्वपूर्ण फसल बीमा योजना और समाज के कमजोर तबके के लिए प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी अनेक योजनायें शुरू की हैं। इतिहास में पहली बार कोयला, खनिज, स्पेक्ट्रम आदि केवल आनलॉइन नीलामी के जरिये उपलब्ध हो रहे हैं। खनन क्षेत्र को निवेश के लिए खोला गया है। बिना भेदभाव के आवंटन प्रणाली पहले की घोटाला संस्कृति से पूरी तरह भिन्न है।
भारत में कराधान को बहुत आक्रामक माना जाता है । आज 94 प्रतिशत करदाता अपने रिटर्न आनलाइन फाइल करते हैं । सभी करदाताओं को अपने रिफंड की राशि घर बैठे ही डिजिटलीकृत प्रणाली से मिल जाती है और केवल एक प्रतिशत लोगों को ही व्यक्तिगत तौर पर अपने कर आकलन विभाग से सम्पर्क करना पड़ता है। प्रत्यक्ष करों को तर्कसंगत बनाया जा रहा है ताकि निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के साथ ही निवेश को बढ़ाया जा सके ।
वस्तु एवं सेवा कर :जीएसटी: लागू होने जाने के बाद यह आजादी के बाद अब तक के सबसे बड़े कर सुधारों में शामिल होगा । यह देशभर में वस्तु एवं सेवाओं का निर्बाध अंतरण सुनिश्चित करेगा । इससे कर चोरी रूकेगी, आधिक कर एकत्र हो सकेगा और जीडीपी बढ़ेगी । बैंकिंग क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है । छोटे बैंकों और पेमेंट बैंकों ने उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प पेश किये हैं। ऐसे बैंकों के लिए आसानी से लाइसेंस मिल जाता है। दिवाला और रिण शोधन अक्षमता कानून, सरफेसी कानून और रिण उगाही पंचाट को मजबूत कर बैंकों को अपनी बकाया धनराशि वसूलने में काफी सहूलियत होगी ।
14वें वित्त आयोग ने केंद्रीय पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढाकर 42 प्रतिशत कर दी है, इससे राज्य विकास पर अधिक धनराशि खर्च कर सकेंगे। पिछले दो वर्ष में राजग ने देशभर में अपना जनाधार बढ़ाया है। लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर और असम में विधानसभा चुनाव जीतकर राजग ने अपनी सरकार बनाई है। इस अवधि में हमें दिल्ली और बिहार में हार का सामना भी करना पड़ा । 2014 के बाद अब तक जितने भी राज्यों में चुनाव हुए उन सब में कांग्रेस को पराजय मिली । आज देश के 15 राज्यों में राजग की सरकार है और इसका जनाधधार बढ़ा है। अगले एक वर्ष में सरकार बहुत से महत्वपूर्ण विधेयक लायेगी और अनेक नीति निर्धारक कदम उठाये जायेंगे। हमारा प्रयास होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास करे । हमने दुनिया को दिखा दिया है कि हम एक अलग तरह की सरकार हैं और हम प्रगति की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।

1411 करोड़ की संपत्ति कुर्क होने के बाद बोले विजय माल्या, ईडी की कार्रवाई का कानूनी आधार नहीं

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा खुद की और अपनी एक कंपनी की 1,411 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क किए जाने के एक दिन बाद शराब कारोबारी विजय माल्या ने रविवार को कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए न तो कोई औचित्य है, न ही कानूनी आधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियां उनके खिलाफ अत्यधिक पूर्वाग्रह से काम कर रही है।

ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए माल्या ने कहा, 'मनी लाउंड्रिंग प्रीवेंशन एक्ट (पीएमएलए) के तहत जो संपत्ति कुर्क की गई है वह किंगफिशर एयरलाइन के शुरू होने से कई साल पहले की है। ईडी द्वारा की गई सिलसिलेवार कार्रवाई के पीछे कोई औचित्य या कानूनी आधार नहीं है। ईडी बैंकों का पैसा चुकाने के लिए संसाधन जुटाने को अब और मुश्किल बना रही है।'
दीवानी विषयों को बगैर आधार फौजदारी आरोपों से जोड़ा जा रहा है
उन्होंने एक बयान में कहा, 'विशुद्ध रूप से ऋण वसूली जैसे दीवानी विषयों को बगैर किसी आधार के फौजदारी आरोपों के साथ जोड़ा जा रहा है।' माल्या ने कहा कि मीडिया में आई खबरें और ईडी का एक ट्वीट संकेत देता है कि ईडी ने मेरी और यूनाइटेड ब्रीवरीज होल्डिंग लिमिटेड से जुड़ी विभिन्न संपत्तियां कुर्क की हैं। यह एक सार्वजनिक कंपनी है और ईडी की किसी जांच का विषय नहीं है।
माल्या ने कहा कि ईडी के ताजे कदम से प्रतीत होता है कि यह ऐसे कारणों को लेकर मुझे फरार घोषित करने के लिए पीएमएलए अदालत का रुख करने का है जो मैं नहीं समझ सकता। उन्होंने कहा कि वह जिनिवा में बैठक के लिए भारत से निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक दो मार्च को रवाना हुए थे। उस समय ईडी की कार्यवाही शुरू नहीं हुई थी और उन्हें कोई समन जारी नहीं किया गया था।
उन्होंने बताया कि सभी सरकारी एजेंसियां उन्हें पेशी से मिली पिछली छूटों को रद्द कराने के लिए विभिन्न अदालतों में जा रही हैं, ताकि मेरे खिलाफ और भी गैर जमानती वारंट जारी हो सकें। यह सभी मेरे प्रत्यर्पण के लिए एक मामला बनाने को लेकर एक सामूहिक प्रयास लगता है।
उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से लगता है जैसे ये एजेंसियां अत्यधिक पूर्वाग्रह वाली जांच कर रही हैं और मुझे बगैर मुकदमे के पहले ही दोषी ठहरा चुकी हैं, जिसके बाद मुझे खुद को बेकसूर साबित करने की जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि वह बैंकों से संपर्क कर उनसे एक समिति नामित करने का अनुरोध कर रहे हैं जो बैठकर उनके साथ एक बार में समाधान कर लें।

मथुरा, कैराना की घटनाओं को लेकर अमित शाह ने सपा सरकार पर किया हमला

इलाहाबाद, 12 जून :भाषा: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में मथुरा और कैराना की हाल की घटनाओं को लेकर राज्य की समाजवादी पार्टी सरकार पर हमला करते हुए आज कहा कि राज्य में ‘‘हिंसा का वातावरण’’ व्याप्त रहना गंभीर चिंता का विषय है।

शाह ने मथुरा में हाल में हुए टकराव के साथ ही कैराना में हिंसा एवं उसके बाद 100 से अधिक परिवारों के पलायन का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘वर्तमान समाजवादी सरकार प्रत्येक दिन ऐसी स्थितियों से निपटने में अपनी लाचारी व्यक्त कर रही है।’’ शाह ने अखिलेश यादव सरकार पर सीधा हमला करते हुए आज यहां शुरू हुई भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कहा, ‘‘भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विकास की कमी और शासन का अभाव बढ रहा है और यह एक गंभीर चिंता का मामला बन गया है।’’ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शाह के भाषण के बारे में संवाददाताओं को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष शाह ने विशेष तौर पर उत्तर प्रदेश के बारे में चर्चा की और कहा कि यहां ‘‘हिंसा का वातावरण है जिस पर काबू पाने में सरकार असफल रही है।’’ मथुरा में घटित हाल की घटनाओं पर शाह ने कहा कि सरकारी जमीन को ‘‘संरक्षण से’’ बलपूर्वक हथियाने की राजनीति ‘‘बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।’’


महिलाओं को शिक्षित करना महत्वपूर्ण है: अमिताभ बच्चन

मुंबई। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का मानना है कि शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि देश की महिलाओं और बेटियों को शिक्षित
करना अत्यंत जरूरी है। अभिनेता (73) ने कहा कि वह महिला शिक्षा के उद्देश्य में योगदान देते रहेंगे, क्योंकि उनका मानना है कि यह बेहद जरूरी है।बच्चन ने एक समारोह में कहा, ‘‘धन कोई भी चुरा सकता है, लेकिन ज्ञान को आपसे कोई नहीं चुरा सकता। लिहाजा मेरा मानना है कि शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए क्योंकि देश की महिलाओं और बेटियों को शिक्षित करना बेहद जरूरी है। और.. इस उद्देश्य में मैं अपने तरीके से योगदान देना जारी रखूंगा।’’ ‘पीकू’ के अभिनेता ने पठन पाठन संबंधी एक नए लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम ‘रोबोमेट प्लस एप’ का उद्घाटन किया।
अभिनेता ने कहा, ‘‘मेरे जीवन में कई घटनाओं ने मुझे प्रेरित किया है.. मेरा मानना है कि ज्ञान एक ऐसी ढाल है जो आपकी तमाम शस्त्रविहीन दुश्वारियों से रक्षा करेगा। कभी भी पढ़ाई मत छोड़िए क्योंकि पढ़ाई कभी रूकती नहीं।’’ बच्चन ने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए बताया कि वह और अधिक ज्ञान हासिल करने के लिए अब भी स्कूल और कॉलेज जाने के लिए लालायित रहते हैं। उन्होंने वहां मौजूद युवा छात्रों को सलाह दी कि वे इस तरह से पढ़ाई करें कि वह उन्हें आजीवन याद रहे। उन्होंने कहा, ‘‘एक व्यक्ति अपने जीवन में दो चीजें कभी नहीं भूलता, एक तैरना और दूसरा साइकिल चलाना और यह उसे कई साल बाद भी याद
रहती हैं। अगर हम अंतिम परिणाम के बारे में सोचे बिना इसी तरीके से पढ़ाई करें तो वह भी हमें याद रहेगी.. अगर आप ज्ञान के पीछे भागेंगे तो नंबर आपके पीछे..पीछे आएंगे।''
एनएसजी संबंधी भारत की अर्जी पर 24 को विचार होगा
विएना। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में सदस्यता के लिए भारत की अर्जी पर दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में इस महीने के अंत में होने वाले एनएसजी के पूर्ण अधिवेशन में विचार किए जाने की संभावना है। विएना में हुई एनएसजी की दो दिवसीय बैठक में इस मुद्दे पर किसी निष्कर्ष पर न पहुंच पाने के बाद यह फैसला किया गया। अमेरिका भारत की सदस्यता का पुरजोर समर्थन कर रहा है और ज्यादातर सदस्य देश भी समर्थन कर रहे हैं, लेकिन इसका विरोध कर रहे चीन की दलील है कि एनएसजी को नए आवेदकों के लिए विशिष्ट शर्तों में ढील नहीं देनी चाहिए। एनएसजी संवेदनशील परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच को नियंत्रित करता है।


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