हर्षित श्रीवास्तव,:- कोरोना महामारी ने मानो पूरी दुनिया को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है । कोविड -19 की वैक्सीन नहीं होने के कारण पूरे विश्व में मानवजाति का विनाश हो रहा है। लेकिन इस विनाश कि स्थिति में अभी सबसे बड़े वैक्सीन हमारे 'कोरोना वॉरियर्स' ही है, जिनके निस्वार्थ सेवा और समर्पण के वजह से हमारे देश में मरीज काल के गाल में जाने से बच रहे हैं । इन्होने ने हमारी सुरक्षा के लिए दिन रात एक किया हुआ है, लेकिन सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि इस संकट की घडी में भी कुछ जगहों पर में इन देवदूतों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है, इन पर पत्थर बरसाये जा रहे हैं । दुर्भाग्यवश कहना पड़ रहा है कि भारत में इस महामारी के दौरान कुछ नए पत्थरबाजों ने जन्म ले लिया है जो किसी आतंकवादी से कम नहीं हैं । बता दे कि देश में कुछ समय पहले ये धर्म के ठेकेदार आतंकवादियों को छुपाने के लिए सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर बरसाया करते थे ठीक उसी तरह आज ये वैश्विक महामारी के छुपे हुए दुश्मन कोरोना वायरस को बचाने के लिए कर रहें हैं । हालात आज भी वही हैं ऐसी सोच के लोग केवल देश को हिंसा की भावना में ही डालना जानते है,| देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण हमारे 'फ्रंट लाइन' योद्धा चाहे वो डॉक्टर्स, पुलिसकर्मी हो या सफाईकर्मी दिन रात लोगों की पूरी तन्मयता से सेवा कर रहे है लेकिन ये जाहिल उनकी जान लेने पर तुले हुए हैं। देश का नाम इन जैसे लोगों के कारण शर्म से झुकता है | सवाल है कि क्या इन वॉरियर्स की सुरक्षा केवल सरकार की ज़िम्मेदारी है? इस मुश्किल घड़ी में केवल सरकार नहीं हर एक इंसान को इनकी सेवा का हमेशा कृतज्ञ होना पड़ेगा। ऐसे वॉरियर्स के साथ हमें कंधे से कंधे मिलाकर चलना होगा, उनका मनोबल बढ़ाना होगा जिससे पूरा विश्व इस संकट से बच सके और साथ ही साथ इन देश के दुश्मनों के लिए कड़े कानून बनाने होंगे जिससे इन पर लगाम लगाई जा सके | हमें खुद को और अपने देश के लोगों को इन सेवकों के प्रति सम्मान की भावना को जागृत करने के लिए जिम्मेदार होना पड़ेगा|
सिद्ध भूमि न्यूज़ नेटवर्क:: शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय का 59वाँ वार्षिकोत्सव 29 जून 2020 को आयोजित किया गया। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष यह समारोह ऑनलाइन माध्यम के द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रॉय फाउंडेशन के संस्थापक श्री संजीव रॉय आमंत्रित थे। उन्होंने इस अकादमिक सत्र के पुरस्कृत सभी छात्रों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा - “कोरोना के इस संकटग्रस्त अनिश्चित दौर में हमें अपनी क्षमताओं को पहचानना होगा। अपनी अंतर्निहित क्षमताओं द्वारा नये अवसरों का सृजन करना होगा। उन्होंने कहा कि वो यंग इंडिया में नई संभावनाओं को देखते हैं। जब यंग इंडिया की बात होती है, तब पूरा भारत इस देश के युवाओं की ओर हसरत भरी निगाहों से देखता है।" इस अवसर पर शिवाजी कॉलेज के पूर्व छात्र और दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एन. हरिहरन ने अपने विशिष्ट वक्तव्य में कहा कि “ हमें भविष्य की संभावनाओं के प्रति अपने दिलो दिमाग को खुला रखना चाहिए। अपने कॉलेज के दिनों की स्...
