तनु शर्मा : भारत में कुपोषण एक बड़ी समस्या है I जिसका गहरा असर गरीब लोगों पर होता है I आजकल हर जगह भुखमरी की खबर देखने को मिल जाती है जबकि खाद्य भंडार भरे हुए हैं फिर आखिर क्यों इतने लोग भूख से मर रहे हैं I 20 अप्रैल, 2020 तक, हमारे पास 524.5 लाख मीट्रिक टन अनाज का भंडार - 289.5 चावल का और 235 गेहूं का है I सार्वजनिक वितरण प्रणाली को 1942 में भारत में पेश किया गया था। यह उपलब्ध खाद्यान्न को राशन देने की प्रणाली थी अनियोजित लॉकडाउन के तुरंत बाद, बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और अन्य गरीब लोग कमाई के अभाव में किराया देने और भूख से निपटने की स्थिति की आशंका से अपने मूल स्थानों पर वापस जाने लगे। केंद्र और राज्य सरकार दोनों का दावा है कि उन्होंने फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए हैं ताकि उन्हें आवास और भूख की समस्या का सामना न करना पड़े। लेकिन रिपोर्ट एक अलग कहानी बयान करती है। राहत शिविरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। लोगों को पानी और शौचालय की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें उचित भोजन नहीं मिल रहा है। ऐसा लगता है कि सरकार समूहों को सामाजिक सुरक्षा का जाल प्रदान करने के लिए तैयार नहीं है। सरकार में संवेदनशीलता, सहानुभूति और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी दिखती है।
सिद्ध भूमि न्यूज़ नेटवर्क:: शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय का 59वाँ वार्षिकोत्सव 29 जून 2020 को आयोजित किया गया। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष यह समारोह ऑनलाइन माध्यम के द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रॉय फाउंडेशन के संस्थापक श्री संजीव रॉय आमंत्रित थे। उन्होंने इस अकादमिक सत्र के पुरस्कृत सभी छात्रों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा - “कोरोना के इस संकटग्रस्त अनिश्चित दौर में हमें अपनी क्षमताओं को पहचानना होगा। अपनी अंतर्निहित क्षमताओं द्वारा नये अवसरों का सृजन करना होगा। उन्होंने कहा कि वो यंग इंडिया में नई संभावनाओं को देखते हैं। जब यंग इंडिया की बात होती है, तब पूरा भारत इस देश के युवाओं की ओर हसरत भरी निगाहों से देखता है।" इस अवसर पर शिवाजी कॉलेज के पूर्व छात्र और दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एन. हरिहरन ने अपने विशिष्ट वक्तव्य में कहा कि “ हमें भविष्य की संभावनाओं के प्रति अपने दिलो दिमाग को खुला रखना चाहिए। अपने कॉलेज के दिनों की स्...
