ऋषभ अग्रवाल। "कोरोना का कुचक्र टूटेगा, राजस्थान जीतेगा" के मंत्र के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की जनता को विशवास दिलाया कि कोरोना से लड़ने के लिए उनकी सरकार पूरी तरह से सक्षम है। राज्य सरकार का फोकस अधिक से अधिक जांचे करने पर है, इसके चलते प्रदेश के कोरोना प्रभावित जिलों में जांच में तेजी लाने के लिए आरटी-पीसीआर मशीनें उपलब्ध करवाई गयी है। सरकार ने राजस्थान से कुछ मुख्य ज़िले जैसे भरतपुर, डूंगरपुर, बाली, बाड़मेर, उदयपुर और अजमेर में जाँच में तेज़ी लेने के लिहाज से आरटी-पीसीआर मशीने उपलब्ध कराई गई है।
क्या है पीसीआर टेस्ट.?
PCR टेस्ट या RT-PCR एक रियल टाइम प्रतिक्रिया है जिसमे किसी भी रोगज़नक़ से एक वायरस सहित विशिष्ट आनुवंशिक सामग्री की उपस्थिति का पता लगाने के लिए एक परमाणु-व्युत्पन्न विधि है इसमें ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जो डीएनए की प्रतियां बनाता है. 'पोलीमर' उन एंजाइमों को कहा जाता है जो डीएनए की प्रतियां बनाते हैं. 'चेन रिएक्शन' में डीएनए के हिस्से तेजी से कॉपी किए जाते हैं- जैसे एक को दो में कॉपी किया जाता है, दो को चार में कॉपी किया जाता है और इसी तरह ये क्रम चलता रहता है. अमेरिकी जैव रसायन वैज्ञानिक कैरी मुलिस ने पीसीआर तकनीक का आविष्कार किया था. कैरी मुलिस को 1993 में रसायन विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.जबकि वास्तविक समय में आरटी-पीसीआर अब कोरोनवीरस का पता लगाने के लिए सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली विधि है, कई देशों को अभी भी तकनीक की स्थापना और उपयोग में समर्थन की आवश्यकता है। गौरताबलब है कि राजस्थान भी उन शहरो में से एक है कहाँ कोरोना मरीज़ों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। राजस्थान में कोरोना मरीजों का आँकड़ा 2000 को पार कर गया है और करीब 31 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। जिसके चलते टेस्टिंग की संख्या में तेज़ी लाकर संक्रमित लोगो का इलाज कर ही इस वायरस को फैलने से रोक जा सकता है।