उमेश जैन,दिल्ली : भूटान की शाही सरकार के विदेश मंत्रालय के द्वारा जारी किये गए बयान मे भारतीय समाचार लेखो और मीडिया मे प्रकाशित जल की आपूर्ति को रोक देने वाली खबरो को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है साथ ही मे यह भी कहा गया है कि यह भूटान और असम के बीच गलतफहमी से विवाद बनाने का ‘सोचा समझा प्रयास’ है | इस वक्या के पीछे पूरी बात यह है कि असम के किसान वर्ष 1953 के बाद से ही अपनी धान की सिंचाई के लिए भूटान से आने वाले जल स्रोतो का इस्तेमाल कर रहे है इन्ही मे एक स्रोत काला नदी का भी है जो की असम मे बक्सा जिला के पास स्थित है | जब कुछ दिनो पहले बक्सा जिले के किसानो ने धान की सिंचाई करना शुरू किया तो किसी कारण से नदियो मे पानी आना बंद हो गया, जिससे सिंचाई का काम रुक गया | फिर इसके खिलाफ बक्सा किसानो ने विरोध प्रदर्शन किया , सोमवार को किसानो ने रोंगिया-भूटान के बीच के रास्ते को जाम कर अपना क्रोध जताया | यह विरोध प्रदर्शन लगभग दो–तीन दिन तक चला |
पानी रुकने की असली वजह -
असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने भारतीय न्यूज एजेंसी एनआइ द्वारा शुक्रवार जारी की गई विडियो मे विवाद का वर्णन कर बताया कि असम मे सिंचाई का पानी भूटान की पहाड़ियों से आता है | कई बार बड़ी चट्टानो और कंकड़ आदि के कारण पानी का बहाव रुक जाता है | हमने भूटान से बात की और भूटान की तरफ से ये तुरंत ही ठीक कर दिया गया | अब पानी दुबारा आना शुरू हो गया है | अब कोई विवाद नही है और ऐसा कहना की भूटान द्वारा पानी रोका गया वो गलत था |