श्रेय आर्या : एक पल को वह उसके शव को लेकर बदहवास हो जाता तो अगले पल जोर से चिल्लाता, कभी अपनी लाचारी पर पछतावा करता तो कभी सिसकियों में अपनी व्यथा को सुनाता, कभी अपनी गोद में लेकर रोता तो कभी सीने से लगाकर खुद जमीन पर लेट जाता, एक पिता के लिए इससे बड़ा दर्द क्या होगा कि उसका लाडला उसकी आंखों के सामने ही दम तोड़ दे। सदर ब्लाक मिश्रीपुर गांव के निवासी प्रेमचंद्र के 4 वर्षीय बेटे अनुज को पिछले कई दिनों से बुखार की शिकायत थी रविवार को जब वह उसे लेकर अस्पताल पहुंचा अस्पताल पहुंचा अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों ने उसे इलाज मुहैया कराने के बजाय कानपुर ले जाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। काफी मिन्नत और पैर पकड़ने के बाद जब इलाज शुरू किया गया तो अचानक से तबीयत और भी ज्यादा बिगड़ी और बेटे की सांसे थम गईं। जब यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ तो कन्नौज के उस पिता का दर्द जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गई, बेटे के शव से लिपट कर कर रोता एक बाप और चुपचाप बैठी उसकी मां की स्थिति देखकर मानवता भी शर्मसार हो गई। कन्नौज के डॉक्टरों द्वारा दिखाई गई संवेदनहीनता ने एक परिवार की खुशियों को उजाड़ कर रख दिया, इलाज ना हो पाने के कारण एक पीड़ित बच्चा तड़प तड़प कर मर गया। गुहार लगाने के बाद जो कुछ कवायद की भी गई तो बहुत देर हो चुकी थी, रोता- बिलखता एक पिता अपने बेटे के शव को सीने से लगाकर इस व्यवस्था से बस यही पूछ रहा था कि आखिर उसकी खता क्या थी? डॉक्टरों ने जैसे ही अनुज के मृत होने की खबर उसके पिता को दी तो वह उसे गोद में लेकर रोते हुए वार्ड से बाहर निकला और जिसने भी यह मंजर देखा उन सभी की आंखें नम हो गई । अस्पताल प्रशासन पर जब आरोप लगने लगे तो सफाई में सीएमओ कन्नौज ने कहा कि बच्चे को नाजुक हालत में लाया गया था इलाज शुरू कर उसे बचाने की कोशिश की गई थी, किसी भी प्रकार की लापरवाही की बात सरासर गलत है। इस प्रकार के बयानों के बाद अधिकारी मामलों से अपना किनारा तो कर लेंगे लेकिन उन सवालों का क्या जो इस प्रकार की घटनाएं आये दिन देश की स्वास्थ्य व्यवस्था से पूछती हैं। दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों से भी कोरोना के मामलों में इस प्रकार की घटना सामने आ रहीं हैं जहाँ संवेदनशीलता न के बराबर हैं। ऐसे में एक आम व्यक्ति अपनी मजबूरी में आखिर करे तो करे क्या? आज भी भारत मे मातृ मृत्यु दर 77% की हैं, 13 राज्यों में 67 पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम बिना किसी डॉक्टर के ही काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 428 मशीने और 30.39 करोड़ के संसाधन पड़े-पड़े बेकार हो जाते हैं। हमारा देश 2014 मे ही पोलियो मुक्त हो चुका है लेकिन सिस्टम के लंगड़ेपन का क्या? उसकी विक्लांगता से समझौता तो आखिर में जनता को ही करना पड़ता है।
सिद्ध भूमि न्यूज़ नेटवर्क:: शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय का 59वाँ वार्षिकोत्सव 29 जून 2020 को आयोजित किया गया। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष यह समारोह ऑनलाइन माध्यम के द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रॉय फाउंडेशन के संस्थापक श्री संजीव रॉय आमंत्रित थे। उन्होंने इस अकादमिक सत्र के पुरस्कृत सभी छात्रों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा - “कोरोना के इस संकटग्रस्त अनिश्चित दौर में हमें अपनी क्षमताओं को पहचानना होगा। अपनी अंतर्निहित क्षमताओं द्वारा नये अवसरों का सृजन करना होगा। उन्होंने कहा कि वो यंग इंडिया में नई संभावनाओं को देखते हैं। जब यंग इंडिया की बात होती है, तब पूरा भारत इस देश के युवाओं की ओर हसरत भरी निगाहों से देखता है।" इस अवसर पर शिवाजी कॉलेज के पूर्व छात्र और दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एन. हरिहरन ने अपने विशिष्ट वक्तव्य में कहा कि “ हमें भविष्य की संभावनाओं के प्रति अपने दिलो दिमाग को खुला रखना चाहिए। अपने कॉलेज के दिनों की स्...
